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Chandigarh : आईआईटी रोपड़ ने कपड़ा क्षेत्र में पानी का इस्तेमाल 90 प्रतिशत तक कम करने संबंधी तकनीक विकसित की

चंडीगढ़ : भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रोपड़ ने शनिवार को कहा कि उसने एक अभिनव हरित तकनीक ‘एयर नैनो बबल’ विकसित की है जो कपड़ा क्षेत्र में पानी के इस्तेमाल को 90 प्रतिशत तक कम कर सकती है।

आईआईटी (रोपड़) के निदेशक राजीव आहूजा ने यहां एक बयान में बताया, ‘‘कपड़ा क्षेत्र उन उद्योगों में से एक है जहां पानी की अधिक खपत होती है और कपड़ा उद्योग में पानी के उपयोग के प्रबंधन की समस्या को दूर करने की आवश्यकता है। आईआईटी रोपड़ में, हम अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी के संरक्षण के लिए नई तकनीक की प्रसंस्करण विधियों का आविष्कार और समावेश कर रहे हैं।’’

इस तकनीक को विकसित करने वाले नीलकंठ निर्मलकर का कहना है कि एक अनुमान के मुताबिक एक किलोग्राम सूती कपड़े को संसाधित करने में 200-250 लीटर पानी लगता है।

निर्मलकर ने दावा किया कि प्रयोगशाला की रिपोर्टों से पता चलता है कि पानी में फैला हुआ ‘एयर नैनो बबल’ पानी की खपत और रासायनिक मात्रा को 90-95 प्रतिशत तक कम कर सकता है जो अंततः 90 प्रतिशत ऊर्जा की खपत को भी बचाता है।

बयान में कहा गया है कि कपड़ा उद्योग में सबसे अधिक मात्रा में अपशिष्ट जल निकलता है। जल प्रदूषण का प्रमुख स्रोत वस्त्र सामग्री की रंगाई, छपाई और परिष्करण है।

निर्मलकर ने कहा कि यह तकनीक हवा और ओजोन के नैनो बुलबुलों पर आधारित है। उन्होंने कहा कि पानी की खपत कम करने के अलावा, नैनो बबल मशीन के साथ प्रसंस्करण के बाद पानी का पुन: उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि नैनो बबल प्रसंस्करण रसायन के लिए एक वाहक के रूप में कार्य करता है और अतिरिक्त रसायन को कम करता है।

आईआईटी रोपड़ ने नैनोकृति प्राइवेट लिमिटेड नाम के एक स्टार्ट-अप के तहत पर्यावरण अनुकूल तकनीक विकसित की है।

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