
पटना : (Patna) बिहार विधानमंडल में बजट सत्र (Bihar Legislative Assembly) के दौरान सोमवार को विधानसभा प्रश्नकाल में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (economically weaker section) (EWS) के छात्र-छात्राओं को उम्र सीमा में छूट देने का मुद्दा जदयू के विधायक देवेश कांत सिंह ने उठाया।
देवेश कांत सिंह (JDU MLA Devesh Kant Singh) ने सरकार से सीधा सवाल किया कि क्या बिहार में आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को सरकारी नौकरियों और अन्य प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में उम्र सीमा में छूट देने पर कोई विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के कई अभ्यर्थी आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों के कारण समय पर तैयारी नहीं कर पाते, जिससे वे उम्र सीमा पार कर जाते हैं और अवसर से वंचित हो जाते हैं।
जदयू विधायक देवेश कांत ने सदन में कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं की स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार (state government) को संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि क्या बिहार सरकार अपने स्तर पर इस संबंध में कोई निर्णय लेने की स्थिति में है। देवेश कांत सिंह ने उदाहरण देते हुए कहा कि गुजरात, राजस्थान समेत अन्य राज्यों में इस विषय पर चर्चा हुई है, तो क्या बिहार सरकार भी इस दिशा में पहल कर सकती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जैसे अन्य वर्गों को आरक्षण और आयु सीमा में छूट का लाभ मिलता है, वैसे ही आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए भी विशेष प्रावधान पर विचार होना चाहिए।
जदयू विधायक के प्रश्न का उत्तर देते हुए सामान्य प्रशासन विभाग के प्रभारी मंत्री विजय चौधरी (JDU MLA, Vijay Chaudhary) ने स्पष्ट किया कि ईडब्ल्यूएस से संबंधित मूल अधिनियम केंद्र सरकार द्वारा बनाया गया है। उन्होंने कहा कि इस अधिनियम में उम्र सीमा में छूट का कोई प्रावधान नहीं है और उसमें संशोधन या बदलाव करने का अधिकार राज्य सरकार के पास नहीं है। राज्य सरकार केवल केंद्र के अधिनियम के अनुरूप नियमावली बनाकर उसे लागू कर सकती है। इसलिए फिलहाल बिहार सरकार अपने स्तर पर आयु सीमा में छूट देने का निर्णय नहीं ले सकती।
मंत्री विजय चौधरी (Minister Vijay Chaudhary) ने कहा कि सदस्य द्वारा उठाए गए मुद्दे पर सरकार संभावनाओं का अध्ययन कर सकती है। उन्होंने बताया कि अभी तक किसी अन्य राज्य द्वारा ईडब्ल्यूएस वर्ग को आयु सीमा में छूट दिए जाने की आधिकारिक जानकारी सरकार के पास नहीं है। यदि भविष्य में केंद्र सरकार इस संबंध में कोई संशोधन करती है या दिशा-निर्देश जारी करती है, तो राज्य सरकार उस पर विचार कर सकती है।


