
बुडापेस्ट (हंगरी) : (Budapest (Hungary)) हंगरी में संसदीय चुनाव के लिए आज सुबह छह बजे (भारतीय समय अनुसार पूर्वाह्न 9ः30 बजे) मतदान शुरू हो गया है। इस चुनाव ने वैश्विक भू-राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। 16 वर्ष से सत्तारूढ़ प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बान (Prime Minister Viktor Orbán) को विपक्षी पार्टी तिसा के नेता पीटर माग्यार कड़ी टक्कर दे रहे हैं। मतदान शाम सात बजे समाप्त होगा।
सीबीएस न्यूज (CBS News) के अनुसार,संसदीय चुनाव के अमेरिकी हस्तक्षेप के बीच हो रहे हैं। इससे यूरोपीय संघ की चिंता बढ़ गई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (U.S. Vice President J.D. Vance) ने मतदान से पहले ही विक्टर ओर्बान को हंगरी अगला प्रधानमंत्री घोषित कर दिया है। अमेरिका को डर सता रहा है कि यूरोपीय संघ से बढ़ते टकराव के बीच ओर्बान की हार हंगरी को रूसी खेमे में धकेल सकता है।
ओर्बान यूरोपीय संघ की शरणार्थी नीति के कट्टर विरोधी हैं। डोनल्ड ट्रंप और विक्टर ऑर्बान (Donald Trump and Viktor Orbán) दोनों ही कंजरवेटिव विचारधारा के समर्थक हैं। चुनाव सर्वे में विपक्षी नेता पीटर माग्यार को बढ़त के संकेत मिलने से मुकाबला कड़ा हो गया है।
द बुडापोस्ट टाइम्स (The Budapost Times) अखबार के अनुसार, प्रधानमंत्री ओर्बान ने मतदान से पूर्व एक रैली में कहा कि इस बार के चुनाव में देश से बाहर रहने वाले हंगेरियन लोगों का भविष्य दांव पर लगा हुआ। उन्होंने कहा कि इन समुदायों के हितों की रक्षा के लिए उन्हें एक मजबूत सरकार की जरूरत है। प्रधानमंत्री ओर्बान ने दावा किया कि इस बार भी जनता उन्हें अपना अटूट समर्थन देगी।
उन्होंने यूक्रेन से जुड़ी वित्तीय प्रतिबद्धता के प्रति आगाह करते हुए कहा कि यूरोपीय संघ की योजनाओं में यूक्रेन को मदद देने के लिए कर्ज लेना शामिल है, जिसे अंततः सदस्य देशों को ही चुकाना होगा। उन्होंने दृढ़ता से कहा, “यह साफ है कि यह कर्ज नहीं चुकाया जाएगा, इसलिए इसका बोझ सदस्य देशों पर ही पड़ेगा। हंगरी को ऐसी व्यवस्था अस्वीकार है।” प्रधानमंत्री ने युद्ध की शुरुआत में देश की प्रतिक्रिया को भी याद किया। उन्होंने कहा, “हमने अपनी सीमाएं खोल दीं। हमने जरूरतमंदों की मदद की। हम ईश्वर की नजरों में पाक-साफ़ हैं। वे हमसे यह नहीं कह सकते कि हम उनकी खातिर हंगरी को तबाह कर दें।”
उन्होंने आगाह किया कि सस्ती रूसी ऊर्जा तक पहुंच खत्म होने से ईंधन की सुरक्षित कीमतों और यूटिलिटी खर्च में कटौती को खतरा पैदा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसी नीतियों से हंगरी के परिवारों पर भारी बोझ पड़ेगा। उन्होंने कहा कि टैक्स में छूट और लोन योजना उनके अगले कार्यकाल में भी जारी रहेंगी। प्रधानमंत्री ओर्बान ने कहा, “हंगरी को सुरक्षित रखने के लिए हमें तीस लाख वोटों की जरूरत है।”


