भोपाल : मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में शनिवार शाम को नृत्य, गायन एवं वादन पर केंद्रित गतिविधि संभावना का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कलाकारों द्वारा बुन्देली बोली में सावन के गीत और अहिराई नृत्य की प्रस्तुति दी। नरसिंहपुर के सुमित दुबे एवं साथियों ने बुन्देली बोली में सावन के गीत तथा नरसिंहपुर के कमलेश नामदेव एवं साथियों ने अहिराई नृत्य की प्रस्तुति दी।
शुरुआत बुन्देली बोली में सावन के गीत प्रस्तुति से की गई। कलाकारों ने घरर घरर नदिया बहे, अरे रैया गोरिधन पनिया खो जाये (रैया गीत)…, छाई कारी घटा घनघोर घुमड़ घिर घिर आ रय बदरा कारे पाई (लेद)…,के अरे रामा सजे कमर-करधनिया, धनिया यौवन धनवारी (कजरी गीत)…, ले गए चीर मुरारी,हमारो हर ले गए रे (सेरा गीत)…, के सावन भादों की धुंआधार बदारिया,बरस रही भारी (साहुन गीत)…., गीतों की प्रस्तुति दी। मंच पर गायन में सुमित दुबे, कोरस और खड़ताल वादक में राजेश दुबे, हारमोनियम वादन में अंकित दुबे, कोरस और नगड़िया वादन में कपिल नेमा, मजीरा वादन में राजीव शर्मा, ढोलक वादन में दशरथ मेहरा ने संगत की।
अगले क्रम में कमलेश नामदेव एवं साथी, नरसिंहपुर द्वारा अहिराई नृत्य की प्रस्तुति दी गई। यह नृत्य यादव सुदाय के द्वारा किया जाने वाले अहीर नृत्य मुख्य रूप से कृष्ण जन्मावेसी से प्रारंभ होता है, जो दीपावली की अमावस्या से प्रारंभ होता है एवं अगहन (मार्गशीर्ष ) की पूर्णिमा को समापन होता है। साथ ही मड़ई मेला ग्रामीण क्षेत्रों मे उत्सव का आयोजन होता है, जिसमें अहीर नृत्य किया जाता, जो कि आकर्षण का केन्द्र रहता है। इसमें मृदंग, बांसुरी, कसावरी का प्रयोग कर नृत्य किया जाता है। यह नृत्य दीवारी गायन के पदों पर कंधईया छंद का उपयोग कर नृत्य किया जाता है।


