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Bhopal : मप्र में एलपीजी संकट गहराया

Bhopal: LPG Crisis Deepens in MP

50 हजार होटल-रेस्टोरेंट पर ताला लगने की नाैबत
भोपाल : (Bhopal)
मध्य प्रदेश में रसोई गैस (LPG) का संकट लगातार गहराता जा रहा है। पिछले पांच दिनों से कॉमर्शियल गैस सिलेंडर (commercial gas cylinders) की सप्लाई प्रभावित होने से प्रदेशभर के करीब 50 हजार होटल और रेस्टोरेंट बंद होने के कगार पर पहुंच गए हैं।

राजधानी भोपाल से लेकर छिंदवाड़ा, इंदौर और ग्वालियर तक गैस के लिए मारामारी मची है। कहीं गैस गोदामों पर लंबी कतारें लग रही हैं, तो कहीं पुलिस की निगरानी में सिलेंडर बांटे जा रहे हैं। कई जगहों पर होटल और फूड आउटलेट्स लकड़ी, कोयले या डीजल भट्ठियों का सहारा लेकर खाना बना रहे हैं। गैस सिलेंडर लेने के लिए विभिन्न

स्थानाें पर लंबी-लंबी कताराें के साथ प्रदर्शन हाे रहे हैं। हालांकि प्रदेश के महानगराें और अन्य जिलाें में बंद हाेने की कगार पर पहुंचने वाले होटल और रेस्टोरेंटाें की संख्या की बात करें ताे यह 50 हजार के पार पहुंच चुकी है।

राजधानी भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज (Gandhi Medical College) में भी गैस संकट का असर दिखने लगा है। कॉलेज परिसर के 16 हॉस्टल मेस, जेडीए कैंटीन और मरीजों के सेंट्रलाइज्ड किचन में गैस का स्टॉक केवल दो दिन का बचा है। कॉमर्शियल सिलेंडर की बुकिंग पर 25 दिन की वेटिंग मिल रही है। रेजिडेंट डॉक्टरों का कहना है कि यदि जल्द आपूर्ति बहाल नहीं हुई तो उन्हें खाली पेट ड्यूटी करनी पड़ सकती है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर भी असर पड़ सकता है।

इधर शहर के टीटी नगर दशहरा मैदान स्थित गैस एजेंसी पर सुबह से ही सैकड़ों लोग खाली सिलेंडर लेकर कतार में खड़े नजर आए। शनिवार काे सुबह छह बजे से ही उपभोक्ताओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह 11.30 बजे तक 200 से अधिक लोग खाली सिलेंडर लेकर अपनी बारी का इंतजार करते दिखे। दोपहर 12 बजे एक ट्रक सिलेंडर आया। इस दौरान पहले पाने की मशक्कत शुरू हो गई। इससे उपभोक्ता और एजेंसी वालों में नोक-झोंक भी हुई। घंटों के इंतजार के बाद भी कई लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ा है।

रायसेन : गैस नहीं मिली तो सड़क पर उतरे लोग

रायसेन में गैस सिलेंडर नहीं मिलने से लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। सागर रोड स्थित गैस एजेंसी पर सुबह से कतार में लगे उपभोक्ताओं को जब घंटों इंतजार के बाद भी सिलेंडर नहीं मिला तो उन्होंने सड़क पर चक्काजाम कर दिया। बड़ी संख्या में महिलाएं प्रदर्शन में शामिल हुईं। एक महिला ने बताया कि घर में न सुबह की चाय बनी और न बच्चों के लिए खाना। सूचना मिलने पर एसडीएम मनीष शर्मा मौके पर पहुंचे और एजेंसी संचालक को फटकार लगाते हुए शटर खुलवाकर वितरण शुरू कराया।

छिंदवाड़ा: पुलिस की निगरानी में सिलेंडर वितरण

छिंदवाड़ा में गैस भंडार गृहों पर उपभोक्ताओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। विवाद की स्थिति को देखते हुए प्रशासन को पुलिस की मौजूदगी में सिलेंडर वितरण (cylinder distribution under police supervision) कराना पड़ रहा है। गैस की कमी का असर शहर के इंडियन कॉफी हाउस (Indian Coffee House) में भी दिख रहा है, जहां अब पारंपरिक चूल्हों पर नाश्ता तैयार किया जा रहा है।

ग्वालियर: शादियों में डीजल भट्ठियों पर बन रहा खाना

ग्वालियर में एलपीजी संकट ने कैटरिंग कारोबार को बुरी तरह प्रभावित किया है। कॉमर्शियल सिलेंडर नहीं मिलने के कारण शादियों और आयोजनों में डीजल भट्ठियों, लकड़ी और कोयले के चूल्हों पर खाना तैयार किया जा रहा है। बाजार में इंडक्शन चूल्हे और कोयले की मांग 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ गई है। हालांकि व्यापारियों के अनुसार कीमतें फिलहाल स्थिर हैं।

इंदौर: सराफा चौपाटी की रौनक फीकी

इंदौर के मशहूर सराफा बाजार और अन्य फूड हब्स पर भी गैस संकट का असर दिखने लगा है। कई दुकानदार इंडक्शन चूल्हों और इलेक्ट्रिक ग्रिल पर भजिए और सैंडविच बना रहे हैं। कारोबारियों का कहना है कि गैस की कमी के कारण स्वाद और काम दोनों प्रभावित हो रहे हैं, जबकि ग्राहकों की संख्या भी घट गई है।

जबलपुर और दमोह: एजेंसियों पर लंबी कतारें

जबलपुर में होम डिलीवरी ठप होने के कारण गैस एजेंसियों पर लोगों की लंबी कतारें लग रही हैं। महिलाएं और पुरुष घंटों इंतजार कर सिलेंडर लेने को मजबूर हैं। वहीं दमोह रेलवे स्टेशन (Damoh railway station) के पास स्थित एक भोजनालय को गैस नहीं मिलने के कारण बंद करना पड़ा है।

प्रशासन का दावा- स्टॉक पर्याप्त

दूसरी तरफ प्रशासन का दावा कर रहा है कि प्रदेश में गैस का स्टॉक पर्याप्त है और ट्रकों के देर से पहुंचने के कारण आपूर्ति बाधित हुई है। हालांकि जमीनी स्तर पर हालात अभी भी सामान्य नहीं हो पाए हैं और कई शहरों में उपभोक्ताओं को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। कॉमर्शियल गैस की कमी से होटल, रेस्टोरेंट, कैटरिंग और स्ट्रीट फूड कारोबार सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। यदि जल्द आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो प्रदेश के हजारों छोटे-बड़े खानपान कारोबारियों को दुकानें बंद करने की नौबत आ सकती है।

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