
बेंगलुरु : ठेके के बदले नकदी घोटाले के आरोपों का सामना कर रही ‘कर्नाटक सोप्स एंड डिटर्जेंट लिमिटेड’ (केएसडीएल) अपने उत्पादों के लिए घटिया स्तर के कच्चे माल की खरीद से संबंधित 20 करोड़ रुपये के एक और कथित घोटाले में फंस गयी है। एक सरकारी दस्तावेज में यह खुलासा हुआ है।
वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के प्रधान सचिव ने 28 फरवरी को केएसडीएल के प्रबंध निदेशक को तीन साल पहले ‘साबुन के कच्चे माल की खरीद में 20 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय अनियमितता’ के संबंध में उठाए गए कदमों के संबंध में पत्र लिखा है।
इसके कुछ दिन बाद, केएसडीएल के अध्यक्ष एवं भाजपा विधायक मदल विरुपक्षप्पा के बेटे प्रशांत कुमार एम.वी. को लोकायुक्त अधिकारियों ने एक ठेकेदार से 40 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा था। आरोप है कि कुमार केएसडीएल कार्यालय में अपने पिता की ओर से यह रकम ले रहे थे।
केएसडीएल के सूत्रों के मुताबिक, वर्तमान घोटाला वर्ष 2020 में हुआ था और इस मामले की पड़ताल के लिए एक जांच दल भी गठित किया गया था।
सरकारी दस्तावेज के मुताबिक, जांच अधिकारी ने पाया था कि केएसडीएल में उच्च पदों पर आसीन कम से कम चार अधिकारियों को एक गैर-मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से प्राप्त डिग्री के आधार पर सरकारी नौकरी मिली थी। अधिकारी ने इनके खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की थी।
सरकार ने केएसडीएल को 31 मई, 2021 को कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। हालांकि, राज्य सरकार ने कहा कि उसे ’‘कार्रवाई रिपोर्ट पर कोई जानकारी नहीं मिली है।’’
दस्तावेज के मुताबिक, केएसडीएल ने सरकार को उन अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई के बारे में भी नहीं बताया, जिनके खिलाफ लोकायुक्त ने राशि की वसूली की सिफारिश की थी।


