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Begusarai : अहमदाबाद और मुंबई के वैज्ञानिकों ने बेगूसराय में शुरू किया कृषि क्रांति का परीक्षण

बेगूसराय : अर्थव्यवस्था की रीढ़ किसानों और पशुपालकों के आर्थिक प्रगति के लिए बेगूसराय में एक बड़ी पहल हो रही है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के प्रयास से शुक्रवार को यहां अहमदाबाद और मुंबई से आए वैज्ञानिकों ने कृषि के क्षेत्र में नई क्रांति का परीक्षण शुरू किया है।

भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर से आए वैज्ञानिक डॉ. अरुण कुमार एवं अहमदाबाद से आए वैज्ञानिक डॉ. रवि अशावा एवं डॉ. रवि मदान ने प्लाज्मा वाटर और एक एकड़ जमीन में पांच सौ टन नेपियर उत्पादन के संबंध में किसानों को जानकारी दी। मशीन के माध्यम से इसका ट्रायल शुरू कर दिया गया है।

डॉ. अरुण कुमार ने किसानों को बताया कि आकाशीय बिजली सभी पौधा को पर्याप्त नाइट्रोजन देता है। इस बिजली से सभी वायरस और कीड़े मर जाते हैं। सभी चीज को बहुत अधिक न्यूट्रीशन दे देता है। दुनिया में अभी सब चीज तीन पदार्थ ठोस, तरल एवं गैस से बना है। लेकिन अब वैज्ञानिकों ने चौथा तत्व बनाया है प्लाज्मा। आज खेतों में नाइट्रोजन के लिए लोग खाद देते हैं। लेकिन प्लाज्मा वाटर के उपयोग से खेत में किसी भी प्रकार के खाद की जरूरत नहीं पड़ेगी।

डॉ. मनीष अशावा ने किसानों को बताया कि ट्रेडिशनल खेती में जमीन के अंदर कार्बन की व्यवस्था नहीं हो पाती है। रासायनिक खाद के उपयोग से कार्बन कम होते जा रहा है। प्रोडक्शन बढ़ाने से फसल चक्र कमजोर होता है। अभी कार्बन की स्थिति एक प्रतिशत से भी कम पर आ गया है। हम पानी का ट्रीटमेंट करेंगे, पानी और जमीन के ट्रीटमेंट से फसल चक्र ठीक हो जाएगा। बिहार में बेगूसराय के वनद्वार से इसकी शुरुआत की जा रही है।

मौके पर उपस्थित गिरिराज सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राजनीति में नया बदलाव लाया है। इसी बदलाव को सोचकर बिहार के बेगूसराय में सर्वेश कुमार एवं उपेन्द्र प्रसाद सिंह के साथ मिलकर नया प्रयास किया जा रहा है। 35-40 लीटर दूध देने वाली गाय कैसे पैदा हो, किसानों को एक एकड़ जमीन में पांच सौ टन हरा चरा कैसे मिले।

इसके लिए गुजरात और मुंबई के साइंटिस्ट आए हैं। प्लाज्मा एक्टिवेटेड वाटर फॉर एग्रीकल्चर मशीन का परीक्षण किया जा रहा है। हवा में मौजूद 70 से 76 प्रतिशत नाइट्रोजन को प्लाज्मा में एक्टिवेट करेंगे। खेत में नाइट्रोजन नहीं देना पड़ेगा, पेस्टिसाइड नहीं देना पड़ेगा, जमीन में कार्बन एक्टिवेट होगा। पशुओं के नस्ल में सुधार एवं खेती में सुधार से दूध की नदियां बहेगी।

उन्होंने कहा कि 1960 के दशक में हरित क्रांति आया तो मुजफ्फरपुर के बाद बेगूसराय ने उसे बढ़ावा दिया। श्वेत क्रांति और हरित क्रांति को लोगों ने टारगेट किया। प्लाज्मा युक्त पानी, उचित कार्बन औरा आईवीएफ से क्रांति होगी, दो-चार महीना में यह दिखने लगेगा।

विधान पार्षद सर्वेश कुमार ने कहा कि बिहार के विकास का इंजन बेगूसराय है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए यहां बड़ा काम हो रहा है। बिहार में पहली बार बेगूसराय में आईवीएफ से आठ बछिया पैदा हो चुकी है। 60 जानवर के पेट में 28 अप्रैल को 35-40 लीटर दूध देने वाला बच्चा डाला जाएगा। पांच सौ टन नेपियर उत्पादित करने की दिशा में काम शुरू कर दिया गया है। गांव, गरीब, किसान और पशुपालकों के लिए यह बड़ी पहल है।

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