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Begusarai : बिहार सरकार द्वारा डोमिसाइल नीति बदलने से शिक्षक एवं अभ्यर्थियों में आक्रोश

बेगूसराय : बिहार सरकार द्वारा शिक्षक नियुक्ति में बिहार से बाहर के राज्यों के अभ्यर्थियों को भी आवेदन करने की अनुमति दिए जाने से लोगों में काफी आक्रोश है। टीईटी-सीटीईटी शिक्षक संघ ने इसका कड़ा विरोध किया है।

टीईटी-एसटीईटी उत्तीर्ण नियोजित शिक्षक संघ (गोपगुट) के जिलाध्यक्ष मुकेश कुमार मिश्र ने कहा है बिहार के दस लाख बेरोजगार नौजवानों को रोजगार देने का वादा पूरी तरह से झूठा साबित हो रहा है। सरकार एक तरफ एक लाख 70 हजार शिक्षकों की वैकेंसी निकाल कर बता रही है कि हम नौकरी का दरवाजा खोल रहे हैं।

दूसरी ओर पूर्व से नौकरी में बने हुए नियोजित शिक्षकों को भी इसमें शामिल कर बिहार के नौजवानो को ठगने जा रही है। रिक्ति के विरुद्ध अगर नियोजित शिक्षक ही बहाल हो जाते हैं तो यह नौकरी देने के नाम पर अपना पीठ जरूर थपथपा लेंगे और शोर करेंगे कि इतने लाख लोगों को नौकरी दी। लेकिन हकीकत यही होगी की नई नौकरी नहीं देकर पुराने सामान का ही नया पैकेजिंग कर बाजार में उतार दिया।

जिला महासचिव ज्ञान प्रकाश ने कहा की यह एक अजुबा नियुक्ति नियमावली है। जिसमे अभी तक संशोधन दर संशोधन किया जा रहा है। शिक्षक तो पहले से ही इनके वादाखिलाफी के विरुद्ध सड़कों पर हैं। अभ्यर्थी और उनके परिजन जो वर्षों से नौकरी का इंतजार कर रहे उन्हें भी इन्होंने नहीं बक्शा। विगत पंद्रह दिनों के भीतर ही कई संशोधन किए जा चुके है।

इन संशोधनों में डोमेसाइल हटाकर इन्होंने नौकरी की राह देख रहे बिहार के नौजवानों को फिर से ठगा है। हमारी मांग है की सरकार अपने चुनावी वायदे को पूरा करे और दस लाख बिहार वासी को नौकरी देने के लिए डोमेसाइल नीति को पुनः स्थापित करे। नियोजित शिक्षकों को बिना शर्त राज्यकर्मी घोषित कर नियमित शिक्षकों की तरह वेतनमान और सेवा शर्त दे।

उन्होंने कहा कि बिहार के नियोजित शिक्षक एवं शिक्षक अभ्यर्थी तथा बेरोजगार नौजवानों के साथ हुए छल को लेकर आगामी 29 जून को बिहार शिक्षक संघर्ष मोर्चा के बैठक में निर्णायक लड़ाई का एलान किया जाएगा।

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