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Begusarai: गुंजन के रस्सी पर चलते ही खूब बजती है ताली पांच-दस रुपये वाली

Begusarai

बेगूसराय: (Begusarai) सरकार बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ का नारा देते हुए बेटियों के संरक्षण, संवर्धन और शिक्षा के लिए लगातार अभियान चला रही है। इसका असर भी पड़ा है, बेटियां पढ़ रही है, नया इतिहास गढ़ रही है (making new history)। लेकिन इन सबके बीच कुछ ऐसी भी बेटियां है जो पांच साल की उम्र में खेल दिखा कर परिवार को आत्मनिर्भर बनाती है।इसके लिए उन्हें घर से हजारों किलोमीटर दूर का चक्कर भी लगाना पड़ता है। ऐसा ही कुछ परिवार इन दिनों बेगूसराय आया हुआ है। राजस्थान और मध्य प्रदेश से आए यह लोग दिन भर घूम-घूम कर ऐसा करतब दिखा रहे हैं। जिसे देख लोग दांतों तले उंगली दबाने को मजबूर हो जाते हैं और इसमें पहुंचे दर्शक दो-चार-पांच-दस रुपये देते हुए खूब ताली बजाते हैं। ऐसा नजारा बेगूसराय के विभिन्न क्षेत्रों में रोज देखा जा रहा है।

जिला मुख्यालय के महिला कॉलेज रोड में रविवार की सुबह ढोलक और थाली की आवाज के साथ छोटी बच्ची के करतब का नजारा देख लोगों के कदम अपने आप रुक गए। मां सरला ढ़ोलक पर थाप लगा रही थी, भाई अपने पांच साल की छोटी बहन गुंजन को हौसला दे रहा था। आवाज देकर लोगों की भीड़ जुटाई जा रही थी, लोग ढोल की आवाज सुनकर उनके पास पहुंचे।

मां की गोद में दो वर्ष की बच्ची सो रही है और मां, बहन, भाई के हौसलों से उत्साहित गुंजन रस्सी पर चढ़कर खेल दिखा रही थी। लोग भीड़ लगाकर तमाशा देख रहे थे और खूब बज रही थी ताली। बच्ची को रस्सी पर चलते हुए देखकर हर किसी के पैर वहीं थम जाते हैं। कभी खुले पैर, कभी चप्पल पहनकर तो कहीं रिंग पर पैर चलाते हुए रस्सी पर चलती है। इस दौरान सिर पर सामान भी रखी रहती है और दोनों हाथ से एक बांस को पकड़े रहती है।

बच्ची के करतब देखकर हर किसी के पैर ठहर से जाते हैं। करतब देखकर लोग ताली बजाने से नहीं चुकते। खेल का एक राउंड पूरा हो जाने के बाद गुंजन और उसकी बहन सोनाली थाली लेकर दर्शकों के सामने जाती है, जो पैसा मिलता है, मां को दे देती है। कुल मिलाकर कहें तो यह बच्चियां ना सिर्फ अपने परिवार को आत्मनिर्भर बना रही है। बल्कि लोगों को यह भी बता रही है कि मन में जब हौसला हो तो कोई भी कठिन से कठिन काम असंभव नहीं होती है।

पांच साल की गुंजन अभी पढ़ती नहीं है, लेकिन परिवार की तंगी हालत में कमाने की सीख चुकी है। पांच साल के बच्चे तो अपने आपको नहीं संभाल पाते, लेकिन गुंजन अपने परिवार को संभाल रही है। करतब दिखाने के दौरान जो पैसा जमा होता है, उससे परिवार रात और दूसरे दिन का खाना खाते हैं। इस उम्र में जब बच्चों को पढ़ाई करनी चाहिए, वहां गुंजन जैसी बेटी अपनी जान जोखिम में डालकर रस्सी पर खेल दिखाकर परिवार का सहारा बन रही है। जबकि, इस करतब में थोड़ी सी चूक होने पर हमेशा बड़ा खतरा बना रहता है।

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