अयोध्या : (Ayodhya) नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय (Narendra Dev Agriculture and Technology University) में मखाना की कटाई कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही और कुलपति कर्नल (डॉ.) बिजेंद्र सिंह (presence of Agriculture Minister Surya Pratap Shahi and Vice Chancellor Colonel Dr. Bijendra Singh) की मौजूदगी में हुई। विश्वविद्यालय में एक एकड़ भूमि में तीन तालाबों में मखाना की खेती की गई थी, जिसकी बुआई जनवरी में हुई थी और आठ माह बाद फसल तैयार हुई।
कृषि मंत्री का संदेश
सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि यह पहल न केवल विश्वविद्यालय के लिए बल्कि पूर्वांचल के जल-जमाव वाले क्षेत्रों के लिए प्रेरणास्पद है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह मॉडल आने वाले समय में पूरे पूर्वांचल में जल-जमाव (waterlogged areas of Purvanchal) वाली जमीनों के लिए वरदान साबित होगा।
कुलपति ने बताए मखाना की खेती के तरीके
मखाना की कटाई तालाबों या तीन फीट पानी भरे खेतों में की जाती है। पौधे रोपने के लगभग 6 महीने बाद फूल आते हैं, और अक्टूबर-नवंबर में फसल तैयार हो जाती है।किसान लकड़ी की टोकरी का उपयोग करके पानी से बीज निकालते हैं, फिर उन्हें मसलकर, धूप में सुखाकर, छाँटकर और भुनाई करके तैयार किया जाता है। हार्वेस्टिंग दरभंगा (बिहार) के विशेषज्ञ किसानों द्वारा की गई।
कुलपति ने संबंधित वैज्ञानिकों (Vice Chancellor directed) और महाविद्यालयों को निर्देश दिए कि वे किसानों को मखाना की हार्वेस्टिंग और खेती का प्रशिक्षण दें। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षक, वैज्ञानिक और कर्मचारी भी उपस्थित रहे।


