
आनंद शुक्ला
अंबरनाथ : एक घटना ने अंबरनाथ गांव दुर्गादेवी पाडा के नागरिकों को हैरान कर दिया है। 30 जनवरी को इसी घातक मांजा के कारण सुंदर कबूतर को अपनी जान गंवानी पड़ी।
तेज धागा मतलब मांजा, पतंगबाजी प्रतियोगिताओं के दौरान विरोधियों की पतंग काटने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। माँजा सूती धागे के ऊपर काँच व अन्य सामग्री के लेप चड़ाकर कर तैयार की जाने वाली एक डोर है। यह तीखी डोर न केवल दूसरी पतंगो की डोर काटने में सक्षम होती है बल्कि इसके धारदार होने से पतंग उड़ाने वाले इन्सानों सहित बच्चों एवं पक्षियों को भी गंभीर चोटें आती हैं।
माँजा नुक्सानदायक है व पक्षियों की मौत का कारण भी है।
मांजा हर साल हजारों कबूतर, कौवे, उल्लू, गिद्ध एवं अन्य कई पक्षियों की मौत का कारण बनता है। मांजे से टकरा कर आसमान में उड़ते अनेकों पक्षियों के पंख कट जाते है या उनका शरीर घायल हो जाता है। पेड़ों एवं इमारतों पर उलझे मांजे में अनेकों पक्षी फसकर घायल हो जाते हैं।
साथ ही यह माँजा इन्सानों के लिए भी खतरनाक है।
पैदल, मोटरसाइकिल, स्कूटर सवार यात्रा करते हुए अनेकों लोगों ने हवा में लहराते मांजे का शिकार होकर अपनी जान गवाई है। अक्सर, घातक माँजे से गला कटने वाले लोगों के जीवित रहने की उम्मीद कम होती है।
ऐसी ही एक घटना ने अंबरनाथ गांव दुर्गादेवी पाडा के नागरिकों को सुन्न कर दिया है जहा पर एक मंजे के चलते एक कबूतर की जान चले गई।


