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Ahmedabad : ‘बेस्टसैलर’ शब्द समकालीन साहित्य में बहुत तेजी से हो रहा है प्रचलित : शिरीष खरे

अहमदाबाद में अंतराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव का अंतिम दिन

अहमदाबाद : अहमदाबाद अंतराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव’ के अंतिम दिन रविवार को ‘नदी सिंदूरी’ और ‘एक देश बारह दुनिया’ जैसी बहुचर्चित किताबों के लेखक शिरीष खरे के किताबों पर चर्चा की गई। इस अवसर पर खरे ने कहा कि बेस्टसैलर’ शब्द समकालीन साहित्य में बहुत तेजी से प्रचलित हो रहा है। इसकी मूल अवधारणा को भी समझना जरूरी है और बाजार प्रेरित किताबों को भी। फॉलो करने के लिए नहीं बल्कि ट्रेंड बदलने के लिए, क्योंकि फॉलो करके आप उनकी नकल ही कर सकते हैं, भिन्न विषय पर मौलिक लेखन करके खुद को स्थापित नहीं।

अहमदाबाद अंतर्राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव का 8वां संस्करण 24 से 26 नवंबर को अहमदाबाद के थलतेज टेकरा स्थित पर्यावरण शिक्षा केन्द्र में आयोजित किया गया। इस वर्ष साहित्य और मानव वकास विषय पर महोत्सव का उद्घाटन न्यायमूर्ति के जे ठाकर ने किया। गुजरात राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष डॉ एस के नंदा, अखिलेन्द्र मिश्रा, महोत्सव के संस्थापक निदेशक उमाशंकर यादव के साथ देश और विदेश के वक्ता विभिन्न पैनल चर्चाओं, प्रदर्शन, नाटकों और कविता पाठों में शामिल हुए।

रविवार को अंतिम दिन आयोजित सत्र में लेखक शिरीष खरे ने बेस्टसेलर किताबों के लिखने आदि की कला पर चर्चा की। साथ ही उन्होंने पुस्तकों को लेकर समाज के दृष्टकोण को भी बारीकी के साथ प्रस्तुत किया। खरे ने कहा कि यदि बाजार के मानक लेखन को सामाजिक सरोकार से दूर ले जा रहे हैं तो लेखक और पाठकों को इसे संकट और चुनौती के रूप में देखना चाहिए और सामाजिक हस्तक्षेप करते हुए ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँचने की कोशिश करनी चाहिए। पत्रकारिता और साहित्य से संवाद सत्रों में शिरीष ने कहा कि यह दौर मूलत: लेखकों के लिए मुश्किल दौर है कि किताबों की दुनिया में दूसरे क्षेत्रों के चर्चित चेहरों और बिकाऊ विषयों को बढ़ावा मिल रहा है जिससे चिंता होती है कि व्यवसायिक सिनेमा की तरह साहित्य से भी असल भारत गायब न हो जाए। आयोजन में डॉ शिरीष काशीकर, ज्योति यादव, मयंक शेखर, केतन त्रिवेदी समेत अन्य कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

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