अहमदाबाद : (Ahmedabad) जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) (जेजेएस) के तहत महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। अब ग्रामीण भारत में 172 लाख से अधिक अनुसूचित जाति (एससी) घरों में नल के माध्यम से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो चुका है। यह उपलब्धि जल को प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार और आवश्यक संसाधन सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसकी जानकारी लोकसभा में केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री वी. सोमन्ना ने साझा की।
अगस्त 2019 से जल जीवन मिशन (जेजेए) लागू है, जिसमें पूर्व के राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम (National Rural Drinking Water Program) (एनआरडीडब्ल्यूपी) को भी समाहित किया गया है। इस मिशन का लक्ष्य हर ग्रामीण परिवार, विशेषकर अनुसूचित जाति (एससी) परिवारों, को प्रति व्यक्ति 55 लीटर प्रतिदिन (lपीसीडी) बीआईएस:10500 गुणवत्ता वाला स्वच्छ पेयजल कार्यशील नल कनेक्शन के माध्यम से उपलब्ध कराना है। एससी बहुल गांवों को प्राथमिकता देने के लिए जेजेएम फंड आवंटन में 10 फीसदी वेटेज दिया गया है।
केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री वी. सोमन्ना (Union Minister of State for Jal Shakti V. Somanna) के अनुसार, 17 मार्च 2025 तक देश के एससी बहुल ग्रामीण क्षेत्रों के 215 लाख से अधिक ग्रामीण घरों में से 172 लाख से अधिक (80.12 फीसदी) घरों को नल जल कनेक्शन मिल चुका है। गुजरात भी देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल है जिसने अपने एससी बहुल ग्रामीण क्षेत्रों में 100 फीसदी नल से जल कवरेज हासिल कर लिया है।
गुजरात सरकार ने राज्य के एससी बहुल ग्रामीण क्षेत्र में 100 फीसदी नल से जल आपूर्ति का लक्ष्य हासिल करने के लिए जल जीवन मिशन के तहत ने 412 करोड़ रुपये खर्च कर 6,000 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई, जिससे राज्य के 68,000 से अधिक एससी ग्रामीण घरों को नल से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हुआ है। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि में राज्य सरकार के जल वितरण विभाग की संस्था डब्ल्यूएएसएमओ (वॉटर एण्ड सैनिटेशन मैनेजमेन्ट ऑर्गनाइजेशन) की भी अहम भूमिका रही है। डब्ल्यूएएसएमओ ग्रामीण जल समितियों के साथ मिलकर आंतरिक जल आपूर्ति योजनाएँ तैयार करता है, ताकि एससी समुदाय के प्रत्येक घर को नल कनेक्शन सुनिश्चित किया जा सके।
राज्य के एससी बहुल ग्रामीण क्षेत्रों में 100 फीसदी नल से जल आपूर्ति का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए गुजरात सरकार ने संवेदनशील पहल करते हुए, परियोजना की कुल लागत में शामिल 10% सामुदायिक अंश (कम्युनिटी कॉस्ट कॉन्ट्रीब्यूशन) को माफ कर दिया। इस खर्च को पूरी तरह से राज्य सरकार ने वहन किया, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर कोई अतिरिक्त बोझ न आए और वे स्वच्छ जल सुविधा का लाभ आसानी से प्राप्त कर सकें।


