
अहिल्यानगर : (Ahilyanagar) देश में जहां एक ओर जातिगत जनगणना और आरक्षण की राजनीति को लेकर बहस छिड़ी हुई है, वहीं महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले के एक छोटे से गांव ‘सौंदला’ ने एक (Saundla, a small village in Maharashtra’s Ahilyanagar district) ऐसी पहल की है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बनेगी। सौंदला ग्रामसभा ने एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित कर खुद को ‘जाति मुक्त’ घोषित कर दिया है। अब इस गांव के लोग अपने नाम के आगे जातिसूचक उपनाम (सरनेम) का प्रयोग नहीं करेंगे। पांच फरवरी को ग्राम प्रधान शरद बाबूराव अरगड़े की अध्यक्षता में आयोजित ‘विशेष ग्राम सभा’ (“special Gram Sabha”) की बैठक में यह क्रांतिकारी निर्णय लिया गया। बैठक में उपस्थित ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया कि गांव में अब किसी भी सरकारी या गैर-सरकारी सामाजिक कार्यक्रम में जाति का उल्लेख नहीं किया जाएगा। ग्रामीणों का मानना है कि जाति व्यवस्था केवल समाज को बांटने का काम करती है, जबकि विकास के लिए एकता अनिवार्य है।


