
जब कहीं से कोई उम्मीद ना दिखे
तब तुम अपनी हथेलियों को रगड़ कर
अपनी आँखों और चेहरे को गरमाहट देना
ताकि वहाँ जमी नाउम्मीदी पिघलकर हवा हो जाए..
तुम्हें मालूम होना चाहिए कि
जब सारे विकल्प समाप्त हो जाते हैं
तब तुम स्वयं !
विकल्प के रूप में हमेशा शेष रहते हो..
तुम्हारे भीतर
सभी तरह की संभावनाओं का गर्भगृह है
तुम कभी भी
आशा-निराशा को जन्म दे सकते हो..
तुम्हें मालूम होना चाहिए कि
एक सर्द अमावस की रात के बाद
कोहरे को चीरते हुए जो सूर्योदय होता है न
वो तुम हो..।


