
कुछ फूलों के
कुछ कांटों के
कुछ ख्वाइश
कुछ ख्याबों के…
कुछ आंसू के,
कुछ खुशबू के,
कुछ भूली-बिसरी बातों के…
यादों के गुलाल उड़ेंगे, आज तुम्हारे आँगन में
जाने कितने रंग गिरेंगे, आज तुम्हारे आँगन में
न अंगनाई
न भौजाई
लगता नहीं शहर अपना…
न बौराई
न फगुनाई
जबसे छोड़ा है घर अपना…
सब होंगे पर हम ना रहेंगे, आज तुम्हारे आँगन में
जाने कितने रंग गिरेंगे, आज तुम्हारे आँगन में


