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रोजाना एक कविता: आज पढ़िए पराग मांदले की कविता ‘किसी का साथ’

किसी का साथ
इसलिए मिलता है
कि हम सीख सकें
उसके बिना,
और उसके बहाने
किसी के भी बिना,
जीने की कला!
देह मिलती है
कि हम हो सकें
परे देह से।
प्यार बांधने के लिए नहीं
हमेशा के लिए
मुक्त कर देने के लिए होता है।
नींद सुलाने के लिए नहीं
बल्कि एक वृहद स्वप्न में जागने से
उपजी थकान को
कम करने के लिए आती है।
बारिश में सुलगता मन
अगन में तपकर
शीतल हो जाता है।
शब्द मौन का रास्ता न खोलें
सो समझ लेना कि बेकार हैं,
ढँकी आखों से जो देख पाओ कभी
तो जानोगे
कि यह जीवन
धड़कनों का व्यापार नहीं,
मरण का त्यौहार है।
@पराग मांदले

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