spot_img

रोजाना एक कविता : आज पढ़ें अनिता कपूर की कविता शब्द

शब्द ने स्वर से
अवतरित होने का रहस्य पूछा
तो स्वर ने कहा
सृष्टि
शब्दों की गुफाएँ
मैं तपस्वी
मैं बारिश की बंद से आया
शब्दों से लिपट
बादलों से टपका
बिजली में कड़का
हृदय में दहका
चाँदनी की तार में लिपट
तबले की थाप में थिरका
मैं उपवन के उन्माद में हूँ
सुख दुःख की नाव में हूँ
पर मैं सदैव मग्न हूँ
मैं किसी की यादों में
कैनवास के रंगों में भी
तुम्हारे,
शब्दों के अवसाद में लिपट
शीतल वाणी का छंद
मैं हर शब्द का वो संदेश हूँ
जो तुम्हें ओढ़
दीवाना सा
खिलखिलाता हूँ
इंद्रधनुष
हो जाता हूँ

Explore our articles