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रोजाना एक कविता : रूसी भाषा के जानकार पत्रकार कमाल खान को श्रद्धांजलि देते हुए पढ़िए रूसी कवि काएसिन कुलिएव की कविता ‘आदमी लौटकर नहीं आते’

A poem a day

सुबह चली जाती है
और फिर लौटती है
दिन जाता है और फिर आता है
बारी आने पर
रात जाते है और लौट आती है फिर दिन ढलने
पर सिर्फ आदमी जाते हैं तो लौटकर नहीं आते।

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