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रोजाना एक कविता : रूसी भाषा के जानकार पत्रकार कमाल खान को श्रद्धांजलि देते हुए पढ़िए रूसी कवि काएसिन कुलिएव की कविता ‘आदमी लौटकर नहीं आते’

A poem a day

सुबह चली जाती है
और फिर लौटती है
दिन जाता है और फिर आता है
बारी आने पर
रात जाते है और लौट आती है फिर दिन ढलने
पर सिर्फ आदमी जाते हैं तो लौटकर नहीं आते।

Silvassa : सिलवासा के अद्वैत गुरुकुल में ‘कौशल बोध’ क्षमता निर्माण कार्यक्रम का सफल आयोजन

सिलवासा : (Silvassa) सीबीएसई के दिशानिर्देशों के अनुरूप कौशल शिक्षा के अनिवार्य कार्यान्वयन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से सिलवासा स्थित अद्वैत गुरुकुल (Advait...

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