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New Delhi : एशियाई खेलों की टीम से बाहर होने पर मनिका बत्रा ने उठाए सवाल

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New Delhi: Manika Batra raises questions about her omission from the Asian Games team

टीटीएफआई से जवाब मांगा
नई दिल्ली : (New Delhi)
भारत की स्टार टेबल टेनिस खिलाड़ी मनिका बत्रा ने एशियाई खेलों की भारतीय टीम में चयन नहीं होने के मामले पर भारतीय टेबल टेनिस महासंघ (Table Tennis Federation of India) (TTFI) से जवाब मांगा है। मनिका ने कहा है कि यदि उन्हें चयन प्रक्रिया और अपने बाहर किए जाने के कारणों का स्पष्ट तथा तथ्यात्मक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया, तो वह कानूनी कार्रवाई का सहारा लेने के लिए मजबूर होंगी।

मनिका ने बुधवार को एक बयान में कहा कि उनका उद्देश्य टीम में जगह हासिल करना नहीं, बल्कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि लगभग 20 वर्षों से देश का प्रतिनिधित्व करने के बाद वह केवल निष्पक्ष और ईमानदार जवाब चाहती हैं। विश्व रैंकिंग में 51वें स्थान पर काबिज मनिका एशियाई खेलों की पांच सदस्यीय भारतीय महिला टीम में जगह नहीं बना सकीं। उन्होंने कहा कि यदि चयन समिति के निर्णय के पीछे कोई ठोस कारण हैं तो उन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

मनिका ने चयन समिति की मतदान प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। जानकारी के अनुसार अंतिम स्थान के लिए सुतिर्था मुखर्जी, स्वास्तिका घोष और मनिका बत्रा (Sutirtha Mukherjee, Swastika Ghosh, and Manika Batra) के बीच मुकाबला था। चयनकर्ताओं के बीच सहमति नहीं बनने पर मतदान कराया गया, जिसमें पांच मत मनिका के खिलाफ पड़े, तीन उनके पक्ष में रहे और एक सदस्य ने मतदान नहीं किया। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को यह जानने का अधिकार है कि निर्णय किस आधार पर लिया गया, क्या कारण दर्ज किए गए और क्या उन्हें खिलाड़ियों के साथ साझा किया गया।

मनिका ने यह भी पूछा कि मतदान आधारित चयन प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष कैसे माना जा सकता है और पक्षपात रोकने के लिए क्या सुरक्षा उपाय अपनाए गए हैं। उन्होंने भारतीय महिला टीम से बाहर रखी गई आयहिका मुखर्जी का भी समर्थन किया। मनिका ने कहा कि आयहिका ने 2022 एशियाई खेलों में सुतिर्था मुखर्जी के साथ मिलकर भारत को ऐतिहासिक कांस्य पदक दिलाया था, ऐसे खिलाड़ियों का बाहर होना स्वाभाविक रूप से सवाल खड़े करता है।

घरेलू प्रतियोगिताओं में कम भागीदारी को लेकर हो रही आलोचना पर मनिका ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार खेलने वाले खिलाड़ियों को यात्रा, पुनर्वास, वीजा प्रक्रिया और बड़े टूर्नामेंटों की तैयारी जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसलिए राष्ट्रीय रैंकिंग का आकलन इन परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

गौरतलब है कि टीटीएफआई की चयन नीति के तहत राष्ट्रीय रैंकिंग को 50 प्रतिशत, अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग को 40 प्रतिशत और चयनकर्ताओं की रेटिंग को 10 प्रतिशत महत्व दिया जाता है। मनिका का कहना है कि उनका संघर्ष चयन के फैसले के खिलाफ नहीं, बल्कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए है।