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New Delhi : लीपफ्रॉग इंजीनियरिंग की स्टॉक मार्केट में डिस्काउंट एंट्री

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New Delhi: Leapfrog Engineering Makes Discounted Stock Market Entry

कमजोर लिस्टिंग के बाद लगा अपर सर्किट
नई दिल्ली : (New Delhi)
इंटीग्रेटेड इंजीनियरिंग सर्विस देने वाली कंपनी लीपफ्रॉग इंजीनियरिंग सर्विसेज (Leapfrog Engineering Services) के शेयरों ने आज स्टॉक मार्केट ने कमजोर एंट्री कर अपने आईपीओ निवेशकों को झटका दे दिया। हालांकि लिस्टिंग के बाद हुई खरीदारी से शेयर की स्थिति में सुधार हुआ, जिससे कंपनी के आईपीओ निवेशक घाटे से उबर गए।

आईपीओ के तहत कंपनी के शेयर 23 रुपये के भाव पर जारी किए गए थे। आज बीएसई के एसएमई प्लेटफॉर्म पर इसकी लिस्टिंग 4.35 प्रतिशत डिस्काउंट के साथ 22 रुपये के स्तर पर हुई। लिस्टिंग के बाद हुई लिवाली के कारण कंपनी के शेयर कुछ देर में ही 23.10 रुपये के अपर सर्किट लेवल पर पहुंच गए। इस तरह पहले दिन के कारोबार में अपर सर्किट लगने के कारण कंपनी के आईपीओ निवेशक 0.43 प्रतिशत के फायदे में आ गए।

लीपफ्रॉग इंजीनियरिंग सर्विसेज का 88.51 करोड़ रुपये का आईपीओ 17 से 19 जून के बीच सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों की ओर से एवरेज रिस्पॉन्स मिला था, जिसके कारण ये ओवरऑल 2.70 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इनमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (qualified institutional buyers) (QIBs) के लिए रिजर्व पोर्शन 20.32 गुना सब्सक्राइब हुआ था।

इसी तरह नॉन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (non-institutional investors) (NIIs) के लिए रिजर्व पोर्शन में 5.10 गुना सब्सक्रिप्शन आया था, जबकि रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए रिजर्व पोर्शन 0.84 गुना सब्सक्राइब हो सका था। इस आईपीओ के तहत 10 रुपये फेस वैल्यू वाले कुल 11.22 लाख शेयर जारी किए गए हैं। इनमें 27 करोड़ रुपये के 8.42 लाख नए शेयर और 7 करोड़ रुपये के 2.22 लाख शेयर ऑफर फॉर सेल विंडो के जरिये बेचे गए हैं। आईपीओ में नए शेयरों की बिक्री के जरिये जुटाए गए पैसे का इस्तेमाल कंपनी असेंबलिंग यूनिट लगाने, वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों में करेगी।

लीपफ्रॉग इंजीनियरिंग सर्विसेज की वित्तीय स्थिति की बात करें, तो कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी के पास जमा कराए गए ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (draft red herring prospectus) (DRHP) में किए गए दावे के मुताबिक इसकी वित्तीय सेहत उतार चढ़ाव के बावजूद मजबूत हुई है। वित्त वर्ष 2022-23 में कंपनी को 28 लाख रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था, जो अगले वित्त वर्ष 2023-24 में बढ़ कर 16.39 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2024-25 में फिसल कर 16.22 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में अप्रैल से 31 दिसंबर 2025 तक कंपनी को 14.18 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हो चुका था।

इस दौरान कंपनी की राजस्व प्राप्ति में भी उतार चढ़ाव होता रहा। वित्त वर्ष 2022-23 में इसे 105.38 करोड़ का कुल राजस्व प्राप्त हुआ, जो वित्त वर्ष 2023-24 में बढ़ कर 162.88 करोड़ और वित्त वर्ष 2024-25 में घट कर 137.37 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। वहीं पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में अप्रैल से 31 दिसंबर 2025 तक कंपनी को 14.18 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो चुका था।

इस अवधि में कंपनी के कर्ज में लगातार वृद्धि हुई। वित्त वर्ष 2022-23 के अंत में कंपनी पर 13.05 करोड़ रुपये का कर्ज था, जो वित्त वर्ष 2023-24 में बढ़ कर 13.78 करोड़ रुपये और 2024-25 में 20.11 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में अप्रैल से 31 दिसंबर 2025 तक कंपनी पर लदे कर्ज का बोझ बढ़ कर 32.22 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया था।

इस अवधि में कंपनी के रिजर्व और सरप्लस में भी बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2022-23 में ये 4.84 लाख रुपये के स्तर पर था, जो 2023-24 में बढ़ कर 21.23 करोड़ रुपये हो गया। इसी तरह 2024-25 में कंपनी का रिजर्व और सरप्लस 42.54 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में अप्रैल से 31 दिसंबर 2025 तक ये 56.72 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया।

इसी तरह ईबीआईटीडीए (earnings before interest, taxes, depreciation and amortization) 2022-23 में 1.01 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो 2023-24 में बढ़ कर 19.73 करोड़ रुपये हो गया। इसी तरह 2024-25 में कंपनी का ईबीआईटीडीए 21.57 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में अप्रैल से 31 दिसंबर 2025 तक ये 20.18 करोड़ रुपये के स्तर पर था।