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Delhi Excise Scam : जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा नाराज, बोलीं- अब शांत नहीं बैठूंगी

नई दिल्ली : (New Delhi) दिल्ली आबकारी घोटाला मामले (Delhi Excise Scam case) की सुनवाई कर रही दिल्ली उच्च न्यायालय की जज जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा (Justice Swarana Kanta Sharma) की बेंच कुछ लोगों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करेगी। गुरुवार को जस्टिस शर्मा ने कहा कि वो अब इस मामले में शांत नहीं बैठेंगी। उन्होंने कहा कि वो इस मामले में प्रतिवादी बनाए गए कुछ लोगों को उनकी मानहानि करने वाले बयान देने के लिए अवमानना का नोटिस जारी करेंगी।

जस्टिस शर्मा ने कहा कि इस मामले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक (Arvind Kejriwal, Manish Sisodia, and Durgesh Pathak) के सुनवाई के बॉयकाट करने के चलते वो कुछ सीनियर वकीलों को एमिकस क्युरी नियुक्त करने की प्रकिया में लगी थीं लेकिन इसी बीच कुछ लोग कोर्ट पर अपमानजनक आरोप लगा रहे हैं। ऐसे में वो अवमानना की कार्रवाई शुरू करेंगी। शाम 5 बजे कोर्ट का आदेश आएगा।

इसके पहले 8 मई को जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा (Justice Swarana Kanta Sharma) की बेंच ने कहा था कि कोर्ट अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक का प्रतिनिधित्व करने वालों की सहमति का इंतजार कर रही है।

उच्च न्यायालय ने 5 मई को कोर्ट की मदद के लिए तीन वकीलों को एमिकस क्यूरी नियुक्त करने का आदेश दिया था। जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच ने कहा था कि इस मामले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक ने कोर्ट की सुनवाई का बहिष्कार करने का फैसला किया है, ऐसे में तीन एमिकस क्यूरी नियुक्त किए जाएंगे।

इस मामले में केजरीवाल, सिसोदिया और पाठक ने सुनवाई का बहिष्कार करने का फैसला किया है। तीनों ने न तो खुद और न ही किसी वकील के जरिये कोई दलील रखने की बात कही है। तीनों ने उच्च न्यायालय को पत्र लिखकर कहा है कि उन्हें जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा पर भरोसा नहीं है इसलिए वे सत्याग्रह करेंगे।

20 अप्रैल को जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने दिल्ली आबकारी मामले में बरी करने के आदेश के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर सुनवाई से हटने की अरविंद केजरीवाल की मांग खारिज कर दी थी। जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने कहा था कि वे इस आरोप से प्रभावित हुए बिना अपना फैसला सुनाएंगी, ठीक उसी तरह जिस तरह उन्होंने 34 वर्षों की न्यायिक सेवा के दौरान हमेशा किया है।

कोर्ट ने कहा था कि न्यायपालिका और संस्था को ट्रायल पर रखा गया। विवाद को सुलझाने का मार्ग चुना है। न्यायपालिका की शक्ति, आरोपों पर निर्णय लेने के उसके दृढ़ संकल्प में निहित है। मैंने ये आदेश बिना किसी चीज से प्रभावित हुए लिखा है।' जस्टिस शर्मा ने कहा था किमैं हिन्दी में आदेश जारी करुंगी क्योंकि दलीलें भी हिन्दी में दी गयीं। मैं वो उदाहरण दे रही हूं जहां पर अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी के नेताओं को पहली डेट पर राहत दी गई।’ कोर्ट ने एक आदेश का हवाला दिया जिसमें केजरीवाल के पक्ष में एकतरफा आदेश जारी किया गया।

अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच पर सवाल उठाते हुए सुनवाई से हटने की मांग की थी। केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को मामले की सुनवाई से खुद को अलग करने की मांग करते हुए कहा था कि जिस तरह अब तक इस मामले में अदालती कार्यवाही हुई है, उससे उन्हें निष्पक्ष न्याय की उम्मीद नहीं दिख रही है। केजरीवाल ने कहा था कि बिना पक्ष सुने सेशन कोर्ट के आदेश को गलत बताया। उन्होंने कहा था कि 9 मार्च को जब उच्च न्यायालय में पहली सुनवाई हुई तो वहां 23 में से एक भी आरोपित मौजूद नहीं था। कोर्ट में सिर्फ सीबीआई मौजूद थी। लेकिन जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने पहली ही सुनवाई में बिना दूसरे पक्ष की दलीलें सुने यह कह दिया कि ‘प्रथम दृष्टया’ सेशंस कोर्ट का आदेश गलत लगता है। बिना रिकॉर्ड मंगवाए और बिना दलीलें सुने कोर्ट इस नतीजे पर कैसे पहुंच गया।

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