
माले : (Malé) मालदीव में हुए अहम चुनावी मुकाबले में सत्ताधारी दल को बड़ा झटका लगा है। संवैधानिक जनमत संग्रह और मेयर चुनावों में विपक्षी मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी(एमडीपी) (Maldivian Democratic Party) ने मजबूत प्रदर्शन करते हुए बढ़त बनाई है, जिससे सरकार की स्थिति कमजोर होती दिख रही है। इन नतीजों को मोहम्मद मुइज़्ज़ू के नेतृत्व वाली सत्ताधारी पार्टी पीपल्स नेशनल कांग्रेस(पीएनसी)(People’s National Congress) के लिए एक बड़ी राजनीतिक परीक्षा माना जा रहा था।
शुरुआती आंकड़ों के अनुसार बड़ी संख्या में मतदाताओं ने प्रस्तावित संवैधानिक बदलावों को खारिज किया, जबकि मेयर चुनावों में भी विपक्ष ने कई प्रमुख सीटों पर जीत दर्ज कर अपनी पकड़ मजबूत की है। तुर्किए की सरकारी समाचार संस्था अनाडाेलू एजेंसी (एए) (Turkey’s state-run news agency, Anadolu Agency)ने मीडिया रिपोर्टों के हवाले से बताया कि मालदीव की सत्ताधारी पार्टी पीपल्स नेशनल कांग्रेस(पीएनसी)को एक बड़ा झटका लगा है, क्योंकि वह एक अहम संवैधानिक जनमत संग्रह और मेयर पद की दौड़ में हार गई है। इस चुनाव को राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ू के लिए एक परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा था।
रिपोर्ट के मुताबिक शुरुआती नतीजों से पता चला है कि गिने गए वोटों में से 70% लोगों ने उस जनमत संग्रह का विरोध किया है, जिसे देश के राजनीतिक ढांचे के लिए काफी अहम माना जाता है। मेयर पद की दौड़ में, विपक्षी पार्टी मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी (एमडीपी) (Maldivian Democratic Party) ने सभी पांचों शहरों में मेयर की सीटें जीत ली हैं। वहीं, सत्ताधारी पार्टी पीपल्स नेशनल कांग्रेस (पीएनसी) ने 498 काउंसिल सीटों में से 220 सीटें जीती हैं, जबकि एमडीपी ने 207 सीटें हासिल की हैं।
मालदीव में शनिवार को स्थानीय काउंसिल चुनाव, महिला विकास समिति (डब्ल्यूडीसी) के चुनाव और एक राष्ट्रव्यापी जनमत संग्रह एक साथ हुए। इसमें इस बात पर भी वोटिंग हुई कि क्या राष्ट्रपति और संसदीय चुनाव एक ही दिन कराए जाएं। चुनाव आयोग की ओर से आधिकारिक नतीजों की घोषणा देर शाम तक करने की उम्मीद है।
एमडीपी के समर्थक चुनाव में अपनी जीत का जश्न मनाने के लिए राजधानी माले में ‘आर्टिफिशियल बीच’ (‘Artificial Beach’) पर इकट्ठा हुए। माले सिटी काउंसिल की सीटें जीतने वाले उम्मीदवार और माले के मौजूदा मेयर एडम अज़ीम, जो दूसरी बार इस पद के लिए चुने गए हैं, भी इस जश्न में शामिल हुए।
यह जनमत संग्रह 10 फरवरी को संसद द्वारा पारित एक प्रस्तावित संवैधानिक संशोधन से जुड़ा है। इन बदलावों से राष्ट्रपति और संसदीय चुनाव एक साथ कराए जा सकेंगे और संसदीय कार्यकाल के लिए एक निश्चित शुरुआती तारीख तय हो जाएगी।


