
मुंबई : (Mumbai) महाराष्ट्र विधान परिषद में शुक्रवार को उस समय असहज स्थिति बन गई जब वन मंत्री गणेश नाईक (Forest Minister Ganesh Naik) ने ‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहीन’ (“Chief Minister’s Ladki Behen”) योजना को लेकर स्वीकार किया कि इससे अन्य विभागों पर आर्थिक दबाव पड़ रहा है, हालांकि बाद में उन्होंने अपने बयान से यू-टर्न लेते हुए कहा कि योजना किसी भी हाल में बंद नहीं होगी। कांग्रेस सदस्य सतेज पाटील (Congress member Satej Patil) ने कोल्हापुर जिले के शाहुवाडी, राधानगरी और गगनबावडा क्षेत्रों की जंगल बस्तियों की दुर्दशा का मुद्दा उठाते हुए सड़क सुविधा की मांग की थी, जिस पर जवाब देते हुए नाईक के मुंह से ‘अन्याय’ वाली टिप्पणी निकल गई। बाद में उन्होंने बताया कि वन विभाग के पास लगभग 12 हजार करोड़ रुपये की सागवान संपत्ति है, जिसके आधार पर 6 हजार करोड़ रुपये का ऋण लेने का प्रस्ताव तैयार किया गया है ताकि वेतन, पर्यटन विकास, बुनियादी सुविधाएं, धनगरवाड़ों तक सड़क निर्माण और बाघ परियोजना क्षेत्रों से मानव बस्तियों के पुनर्वास जैसे कार्य किए जा सकें, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष भी कम होगा।


