
मुंबई : (Mumbai) मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Chief Minister Devendra Fadnavis) ने शुक्रवार को कहा कि भाषणों में हास्य का स्तर लगातार घट रहा है और इसका आनंद भी फीका पड़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज लोग गलत व्याख्या से बचने के लिए मजाक करने में अत्यधिक सावधानी बरतने लगे हैं। वे विधान भवन में मराठी भाषा गौरव दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। यह दिवस ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित कवि वी.वी. शिरवाडकर (कुसुमाग्रज) (poet V.V. Shirwadkar) की जयंती पर मनाया जाता है।
मजाक को गलत संदर्भ में लेने की प्रवृत्ति
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब हास्य को अनावश्यक रूप से किसी पहचान से जोड़ा जाता है या उसे संदर्भ से बाहर ले जाया जाता है, तो उसकी चमक खत्म हो जाती है। इसी कारण लोग हास्य का प्रयोग बेहद सावधानी से करने लगे हैं और हास्यपूर्ण भाषणों से मिलने वाला आनंद भी कम हो गया है।
मराठी भाषा की ऐतिहासिक विरासत
मराठी भाषा की विरासत पर प्रकाश डालते हुए फडणवीस ने कहा कि इस भाषा ने समाज और शासन व्यवस्था में बड़ा योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने अपने राज्य की आधिकारिक भाषा के लिए शब्दकोश तैयार कराया था और विदेशी शब्दों की जगह स्थानीय शब्दों को बढ़ावा दिया था।
शास्त्रीय भाषा का दर्जा और विविधता
केंद्र सरकार द्वारा मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिए जाने का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने इसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) को दिया। उन्होंने कहा कि मराठी भाषा समृद्ध होने के साथ-साथ विविधताओं से भरी है। विदर्भ क्षेत्र से होने के कारण अपने उच्चारण का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि समय के साथ उन्होंने अपनी भाषा शैली में बदलाव किया।
भाषा से अवसर जुड़ेंगे तो भविष्य मजबूत होगा
मुख्यमंत्री ने कहा कि अंग्रेजी वैश्विक भाषा बनी क्योंकि अंग्रेजों ने लंबे समय तक दुनिया पर शासन किया और लोगों को मजबूरी में भी उसे सीखना पड़ा। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि मराठी भाषा से प्रगति और समृद्धि को जोड़ा जाए और उससे जुड़े अवसर पैदा किए जाएं, तो भाषा का भविष्य और अधिक मजबूत होगा तथा इसकी निरंतर प्रासंगिकता बनी रहेगी।


