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Mumbai : अजित पवार विमान हादसा : सदन में ‘सवालों का बवंडर’

Mumbai: Ajit Pawar plane crash: A storm of questions in the House

विधान परिषद सभापति ने सरकार को दिए तथ्य पेश करने के निर्देश
सीबीआई जांच और एफआईआर की मांग
मुंबई : (Mumbai)
गुरुवार को महाराष्ट्र विधान परिषद की कार्यवाही शुरू होते ही राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विधायक शशिकांत शिंदे (MLA Shashikant Shinde) ने 28 जनवरी को हुए विमान हादसे का मुद्दा उठाकर सबको चौंका दिया। उन्होंने इस मामले पर चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव पेश किया और साफ़ तौर पर कहा कि पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार (former Deputy Chief Minister Ajit Pawar) की मौत की परिस्थितियां सामान्य नहीं लग रही हैं। अमोल मिटकरी और रोहित पवार (Amol Mitkari and Rohit Pawar) जैसे नेताओं ने भी इस हादसे के पीछे ‘गहरी साजिश’ होने का शक जताया है।

विमान कंपनी की ‘लापरवाही’ पर वार
शशिकांत शिंदे (Shashikant Shinde) ने सदन में दावा किया कि नागर विमानन महानिदेशालय ने पहले ही ‘वीएसआर वेंचर्स’ (whose plane crashed in Baramati) के चार विमानों को उड़ने से रोक दिया था क्योंकि वे सुरक्षा नियमों को ताक पर रख रहे थे। सवाल यह उठाया गया कि जब कंपनी पहले से ही सुरक्षा मानकों में ‘फेल’ थी, तो उसे उड़ने की इजाजत किसने दी और लापरवाही सामने आने के बाद भी अब तक प्राथमिकी दर्ज क्यों नहीं की गई?

सीबीआई जांच की सुगबुगाहट
विपक्ष ने इस मामले को लेकर सरकार को आड़े हाथों लिया और पूछा कि क्या यह वाकई एक हादसा था या कोई ‘भीतरघात’ (Sabotage)? शशिकांत शिंदे ने कहा कि राज्य सरकार ने खुद सीबीआई जांच (CBI investigation) की बात की थी और केंद्र को चिट्ठी भी लिखी थी, लेकिन अब तक उस पर क्या कार्रवाई हुई, यह किसी को नहीं पता। उन्होंने कंपनी के निवेशकों की कुंडली खंगालने की भी मांग की ताकि सच सामने आ सके।

खाकी पर बदसलूकी का इल्जाम
मामला तब और गरमा गया जब विधायक अमोल मितकारी (MLA Amol Mitkari) ने मुंबई के एक पुलिस उपायुक्त के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। मितकारी का आरोप है कि जब वे और रोहित पवार एफआईआर दर्ज कराने गए, तो उक्त अधिकारी ने न केवल शिकायत लेने से मना किया, बल्कि विधायकों के साथ ‘दुर्व्यवहार’ भी किया। उन्होंने सदन से मांग की कि ऐसे अधिकारियों पर तुरंत गाज गिरनी चाहिए जो जनप्रतिनिधियों की बात सुनने के बजाय कंपनी को बचाने में लगे हैं।

हालांकि सभापति राम शिंदे (Chairman Ram Shinde) ने स्थगन प्रस्ताव को तकनीकी कारणों से खारिज कर दिया, लेकिन मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उन्होंने सरकार को ‘खामोश’ नहीं रहने दिया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि राज्य सरकार जल्द से जल्द इस पूरी घटना से जुड़े सभी तथ्यों को सदन की मेज पर रखे और एक विस्तृत बयान जारी करे।

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