
नौसेना में शामिल होने के बाद तमिलनाडु और पुडुचेरी क्षेत्र सहित तटीय इलाकों की सुरक्षा होगी
नई दिल्ली : (New Delhi) एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट प्रोजेक्ट का तीसरा वेसल ‘अंजदीप’ 27 (Anti-Submarine Warfare Shallow Water Craft Project, ‘Anjdeep’) फरवरी को भारतीय नौसेना के समुद्री बेड़े का हिस्सा बन जाएगा। चेन्नई बंदरगाह पर कमीशनिंग समारोह के बाद नौसेना अपनी एंटी-सबमरीन वारफेयर क्षमता बढ़ाने के लिए तैयार है। स्वदेशी पनडुब्बी रोधी रॉकेट, माइन बिछाने की क्षमता और उन्नत सोनार सिस्टम से लैस इस पोत के नौसेना में शामिल होने के बाद भारत के बड़े समुद्री हितों और तमिलनाडु और पुडुचेरी क्षेत्र सहित तटीय इलाकों की सुरक्षा होगी।
भारतीय नौसेना के लिए गार्डन रीच शिपबिल्डर्स और इंजीनियर्स एएसडब्ल्यू शैलो वॉटर क्राफ्ट (एसडब्ल्यूसी) प्रोजेक्ट के तहत आठ जहाजों का निर्माण कर रहा है। एंटी सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (एसडब्ल्यूसी) प्रोजेक्ट के तहत निर्मित ‘अग्रे’ और ‘अक्षय’ (‘Agre’ and ‘Akshay’) शैलो वॉटर क्राफ्ट 13 मार्च 2024 को कोलकाता में लॉन्च किया गये थे। लॉन्च किये गए यह जहाज 5वें और छठे थे, जिनका नामकरण भारतीय नौसेना के पूर्ववर्ती अभय क्लास कार्वेट एग्रे और अक्षय के नाम पर किया गया है। गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) ने 22 दिसंबर 2025 को ‘अंजदीप’ पोत भारतीय नौसेना को सौंप दिया था।
दरअसल, रक्षा मंत्रालय और जीआरएसई के बीच आठ एएसडब्ल्यू एसडब्ल्यूसी जहाजों के निर्माण के लिए 29 अप्रैल 2019 को अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए थे। इन पोतों को नौसेना में शामिल किये जाने वाले समारोह की अध्यक्षता नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी (Navy Chief Admiral Dinesh K. Tripathi) करेंगे। इस जहाज को ‘डॉल्फिन हंटर’ की तरह काम करने के लिए बनाया गया है, जिसका फोकस तटीय इलाकों में दुश्मन की सबमरीन का पता लगाना, उन्हें ट्रैक करना और उन्हें बेअसर करना है। जहाज में देसी, लेटेस्ट एंटी-सबमरीन वारफेयर हथियार और सेंसर पैकेज हैं और यह हल्के टॉरपीडो और स्वदेशी पनडुब्बी रोधी रॉकेट से लैस है।
अर्नाला श्रेणी के जहाज भारतीय नौसेना के सेवारत अभय श्रेणी के एएसडब्ल्यू कार्वेट की जगह लेंगे और इन्हें तटीय जल में पनडुब्बी रोधी अभियानों, कम तीव्रता वाले समुद्री संचालन (एलआईएमओ) और खदान बिछाने के संचालन के लिए डिजाइन किया गया है। यह जहाज 77.6 मीटर लंबे और 105 मीटर चौड़े हैं, जिनमें 900 टन का विस्थापन और 1800 एनएम से अधिक की सहनशक्ति है। ये जहाज वॉटरजेट से चलने वाले सबसे बड़े भारतीय नौसेना के युद्धपोत हैं और यह अधिकतम 25 नॉट्स तक की गति प्राप्त कर सकता है। इसे 80 फीसदी से ज्यादा स्वदेशी सामान के साथ सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ विजन के तहत बनाया गया है। यह जहाज बढ़ते घरेलू रक्षा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र और निर्यात पर निर्भरता कम करने का सबूत है।
नौसेना के मुताबिक अपने मुख्य एएसडब्ल्यू रोल के अलावा यह फुर्तीला और बहुत ज्यादा मैनूवरेबल वॉरशिप कोस्टल सर्विलांस, लो-इंटेंसिटी मैरीटाइम ऑपरेशन्स और सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन्स करने के लिए भी तैयार है। यह जहाज पहले के आईएनएस अंजादीप का नया रूप है, जो 2003 में सेवानिवृत्त किया गया एक पेट्या क्लास कार्वेट था। इस जहाज का नाम कर्नाटक के कारवार तट पर मौजूद अंजादीप आइलैंड के नाम पर रखा गया है, जो भारत के अपने बड़े समुद्री इलाके की सुरक्षा प्रतिबद्धता को दिखाता है।


