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Washington : अवामी लीग पर प्रतिबंध को लेकर शेख हसीना के बेटे ने उठाए सवाल

Washington: Sheikh Hasina's son raises questions about the ban on the Awami League

वॉशिंगटन : (Washington) बांग्लादेश की अपदस्थ पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के पुत्र सजीब वाजेद (Sajeeb Wazed, son of ousted former Bangladesh Prime Minister Sheikh Hasina) ने अवामी लीग पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर अंतरिम सरकार द्वारा लाए गए अध्यादेश की वैधता पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि नई बीएनपी-नेतृत्व वाली सरकार के सामने 30 दिनों की संवैधानिक समय-सीमा है, जिसके भीतर उसे इस अध्यादेश पर फैसला करना होगा।

वाजेद ने एक बयान में कहा कि अंतरिम सरकार ने एंटी टेररिज्म एक्ट 2009 (Anti-Terrorism Act 2009) में संशोधन करने के लिए एक नया अध्यादेश जारी किया, जिससे उसे किसी राजनीतिक दल की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार मिल गया। इसी आधार पर एस.आर.ओ. 137एआईएन/2025 जारी कर अवामी लीग पर कार्रवाई की गई।

उन्होंने बांग्लादेश के संविधान के अनुच्छेद 93(2) का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी अध्यादेश को नई सरकार के गठन के बाद संसद के पहले सत्र में पेश करना अनिवार्य है। यदि 30 दिनों के भीतर संसद उस अध्यादेश को कानून के रूप में पारित नहीं करती, तो वह स्वतः निरस्त हो जाएगा।

वाजेद के अनुसार, बीएनपी-नेतृत्व वाली सरकार के पास दो विकल्प हैं—या तो वह अध्यादेश को समाप्त होने दे, या फिर उसे विधायी मंजूरी देकर स्थायी कानून में शामिल कर दे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि संसद मौजूदा रूप में संशोधन को मंजूरी देती है, तो अवामी लीग को ‘इकाई’ के रूप में प्रतिबंधित करने और निर्वाचन आयोग (Election Commission) द्वारा पंजीकरण रद्द करने जैसी कार्रवाइयाँ न्यायिक समीक्षा के दायरे में आ सकती हैं।

उन्होंने तर्क दिया कि यदि संसद इस संशोधन को पारित करती है, तो यह आतंकवाद-रोधी कानून के “असाधारण उपयोग” का समर्थन माना जाएगा और इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

वाजेद ने कहा कि यदि नई सरकार अध्यादेश को मंजूरी नहीं देती और उसे 30 दिनों बाद समाप्त होने देती है, तो यह अंतरिम प्रशासन की “कठोर नीति” से दूरी बनाने और बहुदलीय लोकतांत्रिक प्रतिस्पर्धा (multi-party democratic competition) के लिए स्थान बहाल करने का संकेत होगा।

उल्लेखनीय है कि अवामी लीग और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (Bangladesh Nationalist Party) (BNP)1990 के दशक की शुरुआत में संसदीय लोकतंत्र की बहाली के बाद से बांग्लादेश की दो प्रमुख राजनीतिक शक्तियां रही हैं। ऐसे में किसी बड़े राजनीतिक दल पर प्रतिबंध का निर्णय कानूनी और राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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