
नई दिल्ली : (New Delhi) फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ (producer of the film Ghuskhor Pandit) के निर्माता ने उच्चतम न्यायालय को बताया कि उनका इरादा किसी की भावनाओं को आहत करने का नहीं था और फिल्म का टाइटल वापस ले लिया गया है। कोर्ट ने इससे संबंधित याचिका का निबटारा करते हुए कहा कि अब इस फिल्म को लेकर कोई नई एफआईआर दर्ज नहीं होनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि इस फिल्म पर जारी विवाद अब बंद किया जाना चाहिए।
फिल्म के निर्माता नीरज पांडे (Film producer Neeraj Pandey) ने उच्चतम न्यायालय में हलफनामा दायर कर कहा है कि मेरा या मेरे प्रोडक्शन हाउस का किसी धर्म, जाति या समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का कोई इरादा नहीं था। फिल्म एक काल्पनिक पुलिस ड्रामा है जो एक अपराध की जांच पर आधारित है। फिल्म में किसी भी जाति, धर्म, समुदाय का अपमान नहीं दिखाया गया है।
हलफनामे में कहा गया है कि फिल्म का पुराना नाम “घूसखोर पंडत” (Ghuskhor Pandit) वापस ले लिया गया है। नया नाम अभी तय नहीं हुआ है। लेकिन जो भी नया नाम होगा, वो बिल्कुल अलग होगा ताकि फिर कोई विवाद न हो। अभी इस फिल्म के नाम से जुड़ी सभी प्रचार सामग्री, पोस्टर और ट्रेलर वापस ले लिए गए हैं।
उच्चतम न्यायालय ने 12 फरवरी को फिल्म घूसखोर पंडत के निर्माता को फटकार लगाते हुए कहा था कि आप अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर किसी समुदाय को नीचा नहीं दिखा सकते हैं। सुनवाई के दौरान फिल्म के निर्माता ने कहा था कि फिल्म का नांम बदला जाएगा। तब कोर्ट ने कहा कि इस संबंध में आप हलफनामा दाखिल कीजिए।
कोर्ट ने कहा था कि जब समाज में पहले से इतनी अशांति है तो इस तरह के नाम माहौल को और खराब कर सकते हैं। अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार अपने आप में कोई असीमित अधिकार नहीं है। उस पर भी वाजिब प्रतिबंध लागू होते हैंं। आप उसकी आड़ में किसी समुदाय को यूं टारगेट नहीं कर सकते हैं। याचिका अतुल मिश्रा (filed by Atul Mishra) ने दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि इस फिल्म के जरिये एक समुदाय विशेष को टारगेट करने की कोशिश की जा रही है।


