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Mumbai : म्हाडा इमारतों के पुनर्विकास का निकलेगा हल

Mumbai: A solution will be found for the redevelopment of MHADA buildings

मुंबई : (Mumbai) गृहनिर्माण राज्यमंत्री पंकज भोयर (Minister of State for Housing Pankaj Bhoyar) मुंबई की वनभूमि व म्हाडा इमारतों (forest land and MHADA buildings in Mumbai) के पुनर्विकास के मसले का हल निकालने का आस्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि वन जमीन पर बसे लोगों के पुनर्वास और म्हाडा की पुरानी इमारतों के रीडेवलेपमेंट का जल्द हल निकाला जाएगा।

राज्यमंत्री पंकज भोयर के मंत्रालय स्थित कार्यालय में मंगलवार को बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में भाजपा एमएलसी प्रवीण दरेकर (BJP MLC Praveen Darekar) सहित अय जनप्रतिनिधी उपस्थित थे। दरेकर ने कहा कि संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान (Sanjay Gandhi National Park) में वर्षों से बसे आदिवासी पाडों को अतिक्रमण नहीं माना जा सकता। ये समाज वन का अभिन्न हिस्सा है। इन बस्तियों में पानी, बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं अभी तक नहीं पहुंची हैं। आदिवासियों का पुनर्वास उसी क्षेत्र की सरकारी जमीन पर किया जाना चाहिए। केतकीपाडा व आसपास के इलाकों में करीब 80 हजार लोगों की आबादी है। बस्तियां बसने के बाद इन जमीनों पर “निजी वन” का आरक्षण लग गया। इससे उनका पुनर्विकास अटका हुआ है। इन जमीनों को संरक्षित वन क्षेत्र से बाहर करने की मांग उन्होंने रखी।

मुंबई की 388 म्हाडा इमारतों (MHADA buildings in Mumbai) के पुनर्विकास के मामले में दरेकर ने कहा कि डीसीपीआर 2034 की धारा 33(24) लागू होने के बावजूद कम भू-क्षेत्र और अधिक निवासियों की संख्या के कारण परियोजना व्यवहार्य नहीं बन पा रही है। उन्होंने 51 प्रतिशत सहमति की शर्त हटाकर म्हाडा द्वारा सक्षम विकासक की नियुक्ति कर पुनर्विकास करने का सुझाव दिया।

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