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Ulhasnagar : शिक्षा बोर्ड के समायोजन का 13 वर्षों से लंबित मामला

उल्हासनगर (Ulhasnagar) : उल्हासनगर में 2013 में महाराष्ट्र सरकार द्वारा सभी नगर निगमों के शिक्षा बोर्ड भंग कर उनके अधिकारियों, शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को संबंधित निगमों में समायोजित करने के आदेश के बावजूद अब तक प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। 13 वर्ष बीत जाने के बाद भी कर्मचारियों का समायोजन न होने से सैकड़ों कर्मचारी अपने वैधानिक अधिकारों से वंचित हैं। इस गंभीर मुद्दे को लेकर शिवसेना शहर प्रमुख एवं नगरसेवक राजेंद्रसिंह भुल्लर ने आयुक्त और महापौर (Shiv Sena city chief and corporator Rajendra Singh Bhullar) से संपर्क कर आक्रामक रुख अपनाया है।

अन्य मनपाओं में पूरी हुई प्रक्रिया, यहां अनदेखी

भुल्लर ने अपने निवेदन में उल्लेख किया कि राज्य की अन्य महानगरपालिकाओं में 2014 तक समायोजन प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी, जबकि उल्हासनगर मनपा प्रशासन ने इसे नजरअंदाज किया। उन्होंने बताया कि 2023 में तत्कालीन आयुक्त शेख ने स्पष्ट कार्यालय आदेश जारी किया था, फिर भी सामान्य प्रशासन विभाग (General Administration Department) ने उस पर अमल नहीं किया। इसे उन्होंने प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर उदाहरण बताया।

कर्मचारियों के वेतन और पेंशन पर असर

समायोजन में देरी के कारण कर्मचारियों की सेवा पुस्तिकाओं में 2013 से आवश्यक प्रविष्टियां नहीं की गईं। इसके चलते वे सरकार द्वारा स्वीकृत वेतनमान, पदोन्नति, पेंशन और अन्य लाभों से वंचित हैं। कई कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद भी उनके अधिकारों के अनुरूप लाभ नहीं मिल पा रहे हैं, जिससे उनमें असंतोष व्याप्त है।

दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग

राजेंद्रसिंह भुल्लर (Rajendra Singh Bhullar) ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि शिक्षा बोर्ड के सभी कर्मचारियों का तत्काल मनपा विभाग में समायोजन किया जाए और 2013 से सेवा पुस्तिकाओं में लंबित प्रविष्टियां पूर्ण की जाएं। साथ ही, वर्षों तक देरी करने और सरकारी आदेश की अवहेलना करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की मांग भी की है।

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