
काठमांडू : (kathmandu) महाशिवरात्रि पर पशुपतिनाथ मंदिर पहुंचे नागा बाबा और अन्य साधुओं (Naga Babas and other sadhus who arrived at the Pashupatinath Temple on Mahashivratri) की मंगलवार को भेंट और दान देकर विदाई की गई है। गुठी संस्थान ने विदाई कार्यक्रम के लिए लगभग 30 लाख नेपाली रुपये का बजट आवंटित किया है।
साधु महाशिवरात्रि के लिए फाल्गुन कृष्ण एकादशी के दिन पशुपतिनाथ पहुंचे (Pashupatinath on Falgun Krishna Ekadashi for Mahashivratri) थे। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष श्रीधर सापकोटा ने बताया कि नेपाल के बाहर से आए 4,000 से अधिक अलग-अलग संप्रदायों के साधुओं को पशुपति क्षेत्र के विभिन्न स्थानों जैसे गोरखनाथ मठ, आर्यघाट के पार रामचंद्र मंदिर, भस्मेश्वर अखाड़ा और निर्मला अखाड़ा में ठहराया गया था। साधुओं के आगमन पर उन्हें लाल, नीले, सफेद, पीले और हरे रंग के कार्ड वितरित किए गए थे और उन्हीं कार्डों की श्रेणी के आधार पर दान दिया जा रहा है। संस्थान के अनुसार नेपाल से बाहर से आए साधुओं को नजदीकी सीमा तक यात्रा में सहायता के लिए दान राशि बढ़ाई गई है।
गुठी संस्थान के पूर्व उप-प्रशासक दीपक बहादुर पाण्डे (Deepak Bahadur Pandey, former Deputy Administrator of the Guthi Sansthan) के अनुसार फाल्गुन कृष्ण औंसी के दिन साधुओं को औपचारिक रूप से विदा करने की परंपरा सन् 1775 से चली आ रही है, जब जंग बहादुर के ज्येष्ठ पुत्र जगत जंग ने जगन्नाथ प्रकाशेश्वर गुठी की स्थापना की थी। इस परंपरा का निर्वहन गुठी संस्थान और पशुपति क्षेत्र विकास ट्रस्ट की ओर से अब भी किया जाता है। पहले नागा बाबा और अन्य साधुओं को थापाथली के कलमोचन घाट से भोजन कराकर विदा किया जाता था, क्योंकि मान्यता थी कि कोट हत्याकांड में मारे गए लोगों का दाह-संस्कार जिस स्थल पर हुआ, वहां से साधुओं की विदाई करने से दिवंगत आत्माओं को शांति मिलती है। अब यह परंपरा बंद कर दी गई है और वर्तमान में साधुओं को पशुपतिनाथ के पश्चिमी मुख्य द्वार से विदा किया जा रहा है।
दीपक बहादुर पाण्डे के अनुसार महाशिवरात्रि के लिए मंदिर परिसर के भीतर पांच दिन और बाहर चार दिन तक धूनी जलाए रखने के लिए 50 हजार किलोग्राम लकड़ी खरीदी गई, जिसकी लागत 7 लाख रुपये रही। पाण्डे के अनुसार कलमोचन घाट स्थित बैरागी, उदासी, संन्यासी और नाथ अखाड़ों में ठहरे नागा बाबा और साधुओं को भी आज दान देकर विदाई दी जा रही है। ट्रस्ट की कार्यकारी सदस्य शीला पंत ने बताया कि श्रेणी के अनुसार 101 से 5,001 नेपाली रुपये तक दान वितरित करने की तैयारी की गई है। इसके लिए ट्रस्ट ने 8 लाख रुपये आवंटित किए हैं। साधुओं को वर्ष भर मंदिर में अर्पित की गई रुद्राक्ष मालाएं भी प्रदान की जाएंगी।


