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Kathmandu : नेपाल के कपिलवस्तु में मिला देश का पहला अर्धवृत्ताकार पुरातन बौद्ध मंदिर

Kathmandu: The country's first semicircular ancient Buddhist temple has been discovered in Kapilvastu, Nepal.

काठमांडू : (Kathmandu) नेपाल के पुरातत्व विभाग ने कपिलवस्तु में देश का पहला अर्धवृत्ताकार (एप्साइडल) बौद्ध मंदिर (Buddhist temple in Kapilvastu) की खोज करने का दावा किया है। माना जाता है कि यह संरचना प्राचीन नगर के केंद्र के पास एक पूर्ववर्ती राजमहल परिसर के अवशेषों के ऊपर निर्मित की गई थी। इस खोज से क्षेत्र में प्रारंभिक बौद्ध स्थापत्य और शहरी धार्मिक प्रथाओं को समझने में महत्वपूर्ण योगदान मिलने की उम्मीद है।

पुरातत्व विभाग, लुम्बिनी विकास ट्रस्ट (Lumbini Development Trust) तथा डरहम विश्वविद्यालय (Durham University) के यूनेस्को चेयर से संबद्ध राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की संयुक्त टीम ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह दावा किया। टीम के अनुसा यह मंदिर तिलौराकोट–कपिलवस्तु क्षेत्र में खोजा गया है, जिसे दक्षिण एशिया के सबसे अच्छी तरह संरक्षित प्रारंभिक ऐतिहासिक नगरों और आंतरिक किलेबंदी परिसरों में से एक माना जाता है।

विभाग के मुताबिक एप्साइडल मंदिर दक्षिण एशिया में धार्मिक स्मारकों की एक विशिष्ट श्रेणी हैं, जिनकी विशेषता संरचना के पवित्र केंद्र को परिभाषित करने वाली घुमावदार दीवारें और विपरीत सिरे पर स्थित प्रवेश मंच होती हैं। ऐसे मंदिरों के सबसे प्रारंभिक उदाहरण शैल-कट (चट्टानों को काटकर बनाए गए) थे, जबकि बाद के काल में इन्हें पत्थर, लकड़ी या ईंट से निर्मित किया गया।

तिलौराकोट–कपिलवस्तु में खोजा गया नया स्मारक (monument at Tilaurakot-Kapilvastu) इसी स्थापत्य विन्यास का अनुसरण करता है। हालांकि, विशेषज्ञों ने इसके स्थान को असामान्य बताया है, क्योंकि इसका निर्माण किसी अलग धार्मिक परिसर में नहीं, बल्कि नगर के भीतर किया गया था। इससे यह शहरी बस्ती के अंदर निर्मित एप्साइडल मंदिर का एक दुर्लभ उदाहरण बन जाता है।

पुरातत्वविदों के अनुसार इस स्थल से बड़ी संख्या में तेल के दीपक मिलने से संकेत मिलता है कि यह स्थान प्राचीन नगर में आने वाले तीर्थयात्रियों और श्रद्धालुओं के लिए लंबे समय तक धार्मिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा होगा। तिलौराकोट–कपिलवस्तु के बाद के इतिहास में भी इस स्थल का धार्मिक महत्व बना रहा। साक्ष्यों से पता चलता है कि एक ऊपरी मंदिर और मठ को ईंटों की पक्की परत से परिभाषित टीले के नीचे जानबूझकर बंद कर दिया गया था।

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