
नई दिल्ली : (New Delhi) उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) में केंद्र सरकार ने कहा है कि लद्दाख के कार्यकर्ता सोनम वांगचुक (Ladakh activist Sonam Wangchuk) को स्वास्थ्य के आधार पर रिहा करना मुमकिन नहीं है। केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि सोनम वांगचुक की अब तक कुल 24 बार स्वास्थ्य की जांच की गई है। वह फिट और तंदुरुस्त हैं।
इसके पहले 4 फरवरी को उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार से कहा था कि उसे सोनम वांगचुक की खराब होती जा रही तबीयत को ध्यान में रखते हुए उनकी हिरासत जारी रखने के फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए। कोर्ट ने केंद्र सरकार के वकील को इस संबंध में निर्देश लेकर कोर्ट को सूचित करने का निर्देश दिया था।
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल (senior lawyer Kapil Sibal) ने 8 जनवरी को चौरी चौरा कांड का जिक्र करते हुए कहा था कि हिंसा के बाद सोनम वांगचुक ने अपनी भूख हड़ताल तत्काल वापस ले ली थी। आपको याद होगा कि गांधीजी ने भी ऐसा ही किया था। जब चौरी चौरा की घटना के बाद हिंसा हुई थी, तो उन्होंने भी बिल्कुल वैसा ही किया था। सिब्बल ने कहा कि हिरासत में लेने के 28 दिन बाद उनको हिरासत में लेने के आधार बताए गए, जो कानूनी समय-सीमा का साफ उल्लंघन है।


