
नई दिल्ली : (New Delhi) असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Assam Chief Minister Himanta Biswa Sarma) के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर सीपीआईएम ने उच्चतम न्यायालय का रुख किया है। आज वकील निजाम पाशा (lawyer Nizam Pasha) ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (Chief Justice Surya Kant) की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने ये मामला उठाया।
निजाम पाशा ने कहा कि असम के मुख्यमंत्री ने मुस्लिम समुदाय को लेकर कई विवादित बयान दिए हैं। एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें मुख्यमंत्री को मुस्लिम टोपी पहने कुछ लोगों पर बंदूक से निशाना साधते हुए दिखाया गया है। इस मामले को लेकर शिकायत की गई है, लेकिन कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई। निजाम पाशा के मेंशन करने के बाद मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि दिक्कत यह है कि जैसे ही चुनाव आते हैं, आधी चुनावी लड़ाई उच्चतम न्यायालय में लड़ी जाती है। हम इसको सुनवाई के लिए लिस्ट करेंगे।
एक याचिका जमीयत उलेमा ए हिंद की ओर से मौलाना महमूद मदनी (Maulana Mahmood Madani) ने भी दायर की है। याचिकाकर्ता की ओर से वकील एमआर शमशाद ने उच्चतम न्यायालय से मांग की है कि संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि सार्वजनिक पदों का दुरुपयोग किसी समुदाय के खिलाफ घृणा फैलाने के लिए नहीं किया जाए। जमीयत की ये याचिका हेट स्पीच पर उच्चतम न्यायालय में पहले से लंबित अर्जी में दायर की गई है।
याचिका में 27 जनवरी के हिमंत बिस्वा सरमा के उस बयान का जिक्र किया गया है, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। याचिका में जमीयत का कहना है कि संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के बयानों को राजनीति बयानबाजी या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कहकर खारिज नहीं किया जाना चाहिए।


