
खड़गपुर : (Kharagpur) शहरी विकास और स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम के रूप में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर (Indian Institute of Technology Kharagpur) (आईआईटी खड़गपुर) और ऑयल इंडिया लिमिटेड (ओआईएल) ने समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इस सहयोग के अंतर्गत आईआईटी खड़गपुर परिसर में एक संपीडित बायोगैस (सीबीजी) संयंत्र स्थापित किया जाएगा।
समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर प्रो. ब्रजेश दुबे, डीन, परिसर एवं समुदाय विकास, आईआईटी खड़गपुर, और रंजन गोस्वामी, कार्यकारी निदेशक (व्यापार विकास), ऑयल इंडिया लिमिटेड, (MoU was signed by Prof. Brajesh Dubey, Dean, Campus and Community Development, IIT Kharagpur, and Ranjan Goswami, Executive Director) द्वारा किए गए।
इस अवसर पर ओआईएल और इसके हरित ऊर्जा विभाग ओआईएल हरित ऊर्जा लिमिटेड (ओजीईएल) (OIL Green Energy Limited) के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। इस पहल का उद्देश्य आईआईटी खड़गपुर को सांकेतिक अर्थव्यवस्था और कचरा से धन मॉडल के लिए राष्ट्रीय स्तर का उदाहरण बनाना है, जिसमें वैज्ञानिक अनुसंधान और व्यावहारिक क्रियान्वयन का समन्वय किया जाएगा।
प्रस्तावित सीबीजी संयंत्र जैविक अपशिष्ट को प्रोसेस करके स्वच्छ संपीडित बायोगैस और कृषि उपयोग के लिए पोषक तत्वों से समृद्ध जैविक खाद का उत्पादन करेगा। यह परियोजना कचरा प्रबंधन, हरित गृह गैस उत्सर्जन और मिट्टी की उर्वरता जैसी शहरी चुनौतियों को सीधे संबोधित करती है।
परियोजना को एक “जीवंत प्रयोगशाला” के (developed as a “living laboratory,”)रूप में विकसित किया जाएगा, जो अनुसंधान, नवाचार, कौशल विकास और उद्यमशीलता (आरआईएसई) को बढ़ावा देगा। मुख्य ध्यान क्षेत्र होंगे – उन्नत कचरा पृथक्करण तकनीकें, गैर-बायोडिग्रेडेबल अपशिष्ट से मूल्य पुनर्प्राप्ति, प्रक्रिया अनुकूलन और स्केलेबल सांकेतिक अर्थव्यवस्था व्यवसाय मॉडल का विकास।
यह पहल भारत के राष्ट्रीय ऊर्जा संक्रमण लक्ष्यों और वैश्विक शून्य-उत्सर्जन (नेट-जीरो) प्रतिबद्धताओं के अनुरूप है और प्रो. सुमन चक्रवर्ती, निदेशक आईआईटी खड़गपुर, और डॉ. रंजीथ राठ, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, ऑयल इंडिया लिमिटेड, की साझा दृष्टि को दर्शाती है।
प्रो. सुमन चक्रवर्ती (Professor Suman Chakraborty) ने कहा कि ऑयल इंडिया लिमिटेड के साथ यह साझेदारी केवल सीबीजी संयंत्र की स्थापना तक सीमित नहीं है। यह एक समग्र और स्केलेबल इकोसिस्टम बनाने का प्रयास है, जहां उन्नत अनुसंधान, सततता और वास्तविक दुनिया में कार्यान्वयन का संगम होगा। हमारा उद्देश्य एक ऐसा कचरा से धन मॉडल विकसित करना है जिसे भारत और वैश्विक दक्षिण के शहरी क्षेत्रों में अपनाया जा सके। कचरे को पर्यावरणीय चुनौती से स्वच्छ ऊर्जा, आर्थिक मूल्य और नवाचार का स्रोत बनाया जा सके।
यह साझेदारी उद्योग और अकादमिक संस्थानों के सहयोग की शक्ति को दर्शाती है। साथ ही शहरी भारत और वैश्विक दक्षिण के लिए सुरक्षित, टिकाऊ और दोहराए जाने योग्य समाधान प्रस्तुत करती है।


