
नई दिल्ली : (New Delhi) दिल्ली के उप राज्यपाल वीके सक्सेना (Delhi Lieutenant Governor VK Saxena) के खिलाफ दायर 25 साल पुराने आपराधिक मानहानि याचिका को दिल्ली के साकेत कोर्ट के जुडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास राघव शर्मा ने खारिज कर दिया है। नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर की ओर से यह याचिका दाखिल की गई थी।
मेधा पाटकर (Medha Patkar) ने दिल्ली के उप राज्यपाल और खादी ग्रामोद्योग निगम के पूर्व चेयरमैन वीके सक्सेना के खिलाफ मानहानि का केस दायर किया था। ये केस जब दायर किया गया था, उस समय वीके सक्सेना नेशनल काउंसिल फॉर सिविल लिबर्टीज के अध्यक्ष थे। पाटकर की याचिका में कहा गया था कि नेशनल काउंसिल फॉर सिविल लिबर्टीज की ओर से 10 नवंबर 2000 में एक अंग्रेजी अखबार में विज्ञापन छपवाया गया था। इस विज्ञापन में गुजरात के सरदार सरोवर बांध का समर्थन किया गया था। मेधा पाटकर का नर्मदा बचाओ आंदोलन सरदार सरोवर बांध का विरोध कर रहा था। विज्ञापन का शीर्षक था “True face of Ms Medha Patkar and her Narmada Bachao Andolan”।
अखबार में छपे विज्ञापन का जवाब देते हुए मेधा पाटकर ने एक नोट जारी किया और उसके बाद वीके सक्सेना के खिलाफ आपराधिक मानहानि याचिका दायर की।
वीके सक्सेना की ओर से दायर एक आपराधिक मानहानि के मामले में मेधा पाटकर को साकेत कोर्ट के मजिस्ट्रेट कोर्ट (Magistrate Court in Sake) ने सजा सुनाई है। मजिस्ट्रेट कोर्ट के फैसले पर उच्चतम न्यायालय ने भी मुहर लगाई थी। हालांकि उच्चतम न्यायालय ने मेधा पाटकर के खिलाफ लगे एक लाख रुपये के जुर्माने के आदेश को निरस्त कर दिया था।


