
नई दिल्ली : (New Delhi) अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ रहे तनाव (tensions between the US and Iran) की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) की कीमत पिछले 4 महीने के ऊपरी स्तर पर पहुंच गई है। आज अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 70.31 प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया। इसी तरह वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड पिछले साल सितंबर के बाद अभी तक के सबसे ऊंचे स्तर 65.09 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक आ गया। हालांकि भारतीय समय के मुताबिक शाम 6 बजे ब्रेंट क्रूड 2.19 प्रतिशत की मजबूती के साथ 69.90 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था। इसी तरह डब्ल्यूटीआई क्रूड 2.30 प्रतिशत की तेजी के साथ 64.66 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंचा हुआ था।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान ने न्यूक्लियर डील नहीं की तो उस पर हमला किया जाएगा। ट्रंप की चेतावनी के कारण मिडल ईस्ट में तनाव बढ़ाने की आशंका बन गई है। ट्रंप की इस चेतावनी की वजह से कच्चे तेल की कीमत में तेजी का रुख बना हुआ है। बताया जा रहा है कि ईरान और अमेरिका के बीच संभावित टकराव की आशंका को देखते हुए कच्चे तेल के आयातकों ने पिछले 14 महीने की अवधि में सबसे लंबे समय के लिए भारी प्रीमियम देने की भी तैयारी कर ली है। इस वजह से कुछ समय पहले तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती सप्लाई के कारण कच्चे तेल की कीमत में आ रही गिरावट के सिलसिले पर तो ब्रेक लगा ही है, इसकी कीमत एक बार फिर तेज होने लगी है।
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर अमेरिका ने ईरान पर हमला किया तो मिडल ईस्ट से होने वाले कच्चे तेल की सप्लाई काफी हद तक प्रभावित हो सकती है। दुनिया भर में होने वाले कच्चे तेल की सप्लाई में मिडिल ईस्ट की हिस्सेदारी लगभग एक तिहाई की है। आशंका जताई जा रही है कि अगर अमेरिका ने हमला किया और उसके जवाब में ईरान ने भी अपनी ओर से कार्रवाई तो होर्मुज स्ट्रेट से होने वाली शिपिंग पूरी तरह से बंद भी हो सकती है।
दुनिया भर में तेल तथा एलएनजी (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) (global transportation of oil and LNG) ले जाने वाले टैंकर होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरते हैं। होर्मुज स्ट्रेट एक संकरा रास्ता है, जो ईरान और अरब प्रायद्वीप को अलग करता है। अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने पर ये रास्ता बंद हुआ या यहां से कार्गो शिप या टैंकर की आवाजाही प्रभावित हुई, तो कई देशों के सामने कच्चे तेल की आपूर्ति का संकट खड़ा हो सकता है। यही वजह है कि इन दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ाने की खबर ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में तेजी का रुख बना दिया है।


