
नई दिल्ली : (New Delhi) दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) के जज ने कांग्रेस नेता कार्ति चिदंबरम (Congress leader Karti Chidambaram) की चीनी नागरिकों को वीजा दिलवाने में रिश्वत लेने के मामले में आरोप तय करने के ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर अब तीसरे जज ने भी सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। जस्टिस गिरीश कथपलिया की बेंच ने इस मामले पर खुद को सुनवाई से अलग कर लिया। इसके पहले जस्टिस अनूप जयराम भांभानी और जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा खुद को सुनवाई से अलग कर चुके हैं। इस याचिका पर अब दूसरी बेंच 28 जनवरी को सुनवाई करेगी।
दरअसल, 23 दिसंबर 2025 को राऊज एवेन्यू कोर्ट (Rouse Avenue Court) ने इस मामले में कार्ति चिदंबरम समेत सात आरोपितों के खिलाफ आरोप तय करने और एक आरोपित को आरोप मुक्त करने का आदेश दिया था। कार्ति ने राऊज एवेन्यू कोर्ट की ओर से अपने खिलाफ आरोप तय करने के आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है।
राऊज एवेन्यू कोर्ट ने कार्ति चिदंबरम के अलावा जिन आरोपितों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था उनमें एस. भास्कर रमन, मेसर्स तलवंडी साबो पावर लिमिटेड, मेसर्स बेल टूल्स लिमिटेड, विरल मेहता, अनूप अग्रवाल और मंसूर सिद्दीकी शामिल हैं। राऊज एवेन्यू कोर्ट ने कार्ति चिदंबरम समेत सात आरोपितों को भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी, 204 और भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 8 और 9 के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया था। राऊज एवेन्यू कोर्ट ने आरोपित चेतन श्रीवास्तव को सभी आरोपों से मुक्त करने का आदेश दिया था।
इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) (Central Bureau of Investigation) ने मई, 2022 में पी. चिदंबरम के आवास पर छापा मारा था। सीबीआई के केस दर्ज करने के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने केस दर्ज किया था। सीबीआई के मुताबिक 14 मई, 2022 को पी. चिदंबरम के आवास पर तलाशी के बाद मामला दर्ज किया गया था। कार्ति चिदंबरम पर आरोप है कि वो 2011 में अवैध रूप से 50 लाख की रिश्वत प्राप्त करने के बाद 263 चीनी नागरिकों के वीजा की सुविधा प्रदान कर रहे थे। सीबीआई ने भास्कर रमन को 18 मई, 2022 को गिरफ्तार किया था। सीबीआई के मुताबिक तलवंडी साबो पावर लिमिटेड ने बेल टूल्स लिमिटेड को 50 लाख की राशि का भुगतान किया, जिसने इसे चीनी वीजा के लिए रिश्वत के रूप में एस. भास्कर रमन को दिया था।


