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Lucknow : विधान मंडलों में न्यूनतम 30 दिन बैठकें होनी चाहिए: ओम बिरला

Lucknow: State Legislatures should hold a minimum of 30 sittings: Om Birla

यूपी विधानसभा में 86वां अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन का समापन
मुख्यमंत्री योगी सहित 28 राज्याें व तीन केंद्रशासित प्रदेशाें के पीठासीनाें ने लिया भाग
लखनऊ : (Lucknow)
लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिरला (Lok Sabha Speaker Om Birla) ने कहा कि राज्य के विधान मंडलों में न्यूनतम 30 दिन बैठकें होनी चाहिए। इन बैठकों में सत्ता पक्ष व विपक्ष समेत सभी दलों के प्रतिनिधियों की बातें आनी चाहिए। जनता चाहती है कि उनके प्रतिनिधि विधानसभा में उनकी समस्याओं को उठाएं और सरकार उनका समाधान करे।

लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिरला बुधवार काे उत्तर प्रदेश विधानसभा में हुए 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन (86th All India Presiding Officers’ Conference) के समापन समारोह काेसंबाेधित कर रहे थे। तीन दिवसीय सम्मेलन के अंतिम दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप सभापति हरिवंश सिंह, उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह भी आदि मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

समापन समारोह में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (Lok Sabha Speaker Om Birla) ने कहा कि जनता यह चाहती है कि उसके चुने गए प्रतिनिधि विधानसभा में उनकी समस्याओं को उठाएं और सरकार उन समस्याओं का उचित तरीके से समाधान करे। आज सभी राज्यों की विधानसभाएं पेपरलेस हो चुकी हैं। डिजिटलीकरण हाे गया है। सब मिलकर कार्य कर रहे हैं। बिरला ने कहा कि संसद भी विधानसभाओं के साथ मिलकर कार्य कर रही है। सदन का हर समय कीमती है। इसलिए सदन के अंदर सहमति और असहमति के लिए जगह है, लेकिन गतिरोध के लिए नहीं है। नारेबाजी और प्रदर्शन के लिए सदन नहीं हैं। राजनीतिक प्रदर्शन सदन के बजाए बाहर करें। ताकि शासन की पारदर्शिता हो सके। लाेकसभा अध्यक्ष ने कहा कि हम सब पीठासीन अधिकारी हैं। हमारी जवाबदेही है। मुझे आशा है कि दो दिन की चर्चा के बाद हम आगे बढ़ेंगे। हमारी कोशिश होगी कि जनता का संवैधानिक संस्थाओं पर भरोसा बढ़े।

इस सम्मेलन में पक्ष और विपक्ष के सदस्याें के साथ कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी माैजूद रहे। इस सम्मेलन में 28 राज्यों और तीन केंद्रशासित प्रदेशों की विधानसभाओं और छह विधान परिषदों के पीठासीन अधिकारियों ने भाग लिया है। सम्मेलन में विधायी प्रक्रियाओं में तकनीक, जनप्रतिनिधियों की क्षमता-विकास और संसदीय जवाबदेही पर विस्तृत चर्चा हुई। आज सम्मेलन का समापन है।

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