
” ह्रीं ” चिंतना श्रीजी
मुंबई : (Mumbai) महाराष्ट्र में मकर संक्रांति के पावन अवसर पर आयोजित होने वाला हल्दी–कुंकू उत्सव (Haldi-Kumkum festival, celebrated in Maharashtra on the auspicious occasion of Makar Sankranti) सामाजिक, सांस्कृतिक और पारंपरिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। इसी परंपरा को सजीव करते हुए 17 जनवरी 2026 को मुंबई के बोरीवली वेस्ट स्थित ओम प्रथमेश बिल्डिंग के टेरेस (January 17, 2026, on the terrace of Om Prathamesh Building in Borivali West, Mumbai) पर महिलाओं के लिए भव्य, सुसंस्कृत और ज्ञानवर्धक हल्दी-कुंकू कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पारंपरिक रीति–रिवाजों के अनुसार महिलाओं ने एक-दूसरे को हल्दी और कुमकुम लगाकर सौभाग्य और मंगलकामनाओं का आदान–प्रदान किया। इस दौरान वाण वाटणे की परंपरा निभाई गई, जिसमें चूड़ियां, साबुन, मसाले और शगुन सामग्री जैसे छोटे-छोटे उपहार वितरित किए गए। पारंपरिक गीतों और आपसी संवाद ने पूरे वातावरण को उल्लास और आत्मीयता से भर दिया।
उत्सव के अवसर पर महिलाएं नई साड़ियां और पारंपरिक आभूषणों में सुसज्जित होकर पहुंचीं, जिससे कार्यक्रम स्थल पर सांस्कृतिक गरिमा और लोकपरंपराओं की सुंदर झलक देखने को मिली। मकर संक्रांति के उपलक्ष्य में छोटी बालिकाओं के लिए आयोजित बोरन्हाण (लड़कियों का हल्दी–कुंकू) (Borhan (Haldi-Kumkum for young girls)) कार्यक्रम भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहा, जहां पारंपरिक वेशभूषा में सजी बालिकाओं ने सभी का मन मोह लिया।
कार्यक्रम का संपूर्ण आयोजन और संचालन शुभांगी एस.एम., रश्मि, सुरेखा वागल, कुंदन वोरा और रेखा अमीन के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। उनके सुव्यवस्थित नेतृत्व में पूरा कार्यक्रम अनुशासन, सौहार्द और भावनात्मक जुड़ाव के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। आयोजन के दौरान आयोजित आध्यात्मिक प्रश्नोत्तरी सत्र ने कार्यक्रम को विशेष आयाम दिया, जिसमें मकर संक्रांति से जुड़े धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहलुओं पर विस्तृत जानकारी साझा की गई।
इस अवसर पर वक्ताओं ने मकर संक्रांति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह पर्व भारत के विभिन्न क्षेत्रों में अलग–अलग नामों से मनाया जाता है। सूर्य के उत्तरायण होने (sun’s northward movement) का वैज्ञानिक और आध्यात्मिक महत्व भी समझाया गया, जिसे नई ऊर्जा, सकारात्मकता और नवआरंभ का प्रतीक माना जाता है।


