
मुंबई : (Mumbai) आने वाले ठाणे महानगर पालिका चुनाव (Thane Municipal Corporation elections) को पृष्ठभूमि में ठाणे ईस्ट के कोपरी संभाग में भले ही पॉलिटिकल माहौल गरम है, लेकिन लोकल वोटर्स बहुत कन्फ्यूज़न में हैं। “मुझे किसे वोट देना चाहिए?” यह एक सीधा सवाल है जो ठाणेकर अब खुलेआम पूछ रहे हैं।
वरिष्ठ पत्रकार और पर्यावरणविद डॉ प्रशांत (Senior journalist and environmentalist Dr. Prashant) का कहना है कि कागज़ पर भले ही अलायंस का हिसाब-किताब एक जैसा लगता है, लेकिन वास्तविकता में चुनाव हर प्रत्याशी अपने दम पर इलेक्शन लड़ता हुआ दिख रहा है। पार्टी लॉयल्टी के बजाय खुद के कैंपेनिंग, अपने लिए वोट मैच करने और सीक्रेट कैंपेनिंग की वजह से वोटर्स ज़्यादा कन्फ्यूज़ हो रहे हैं।
कोपरी डिवीज़न में सड़कों की खराब हालत, पानी की सप्लाई का पक्का न होना, बढ़ता ट्रैफिक जाम, रुके हुए रिहैबिलिटेशन प्रोजेक्ट्स और सिविक सुविधाओं की कमी सालों से एक ही मुद्दे रहे हैं। जब इलेक्शन पास होता है, तो वादे किए जाते हैं, लेकिन लोगों में यह मज़बूत भावना है कि वोटिंग के बाद इन मुद्दों को नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है।दिलचस्प बात यह है कि वोटर्स एक ही अलायंस के कैंडिडेट्स को इनडायरेक्टली एक-दूसरे के खिलाफ कैंपेन करते हुए देख रहे हैं। तो, पार्टी ज़्यादा ज़रूरी है या कैंडिडेट? या अपनी नाराज़गी ज़ाहिर करने के लिए हमें वोटिंग से बचना चाहिए? यह सवाल भी उठ रहा है।
जबकि पॉलिटिकल कैंपेन का शोर बढ़ रहा है, कोपरी में वोटर शांति से हालात का अंदाज़ा लगा रहे हैं। इस बेचैनी से किसे असर पड़ेगा, और वोटर आखिरी समय में क्या फ़ैसला लेंगे, यह आने वाले चुनाव तय करेंगे।
पर्यावरणविद प्रशांत रवींद्र सिनकर ने आरोप लगाया है कि “कोपरी में डेवलपमेंट के नाम पर नेचर से उसकी राय नहीं पूछी जा रही है। कंक्रीट का जंगल बढ़ रहा है, लेकिन सांस लेने की जगह कम होती जा रही है। चुनाव में भाषण हरे आकर्षक और लुभावने दिखते हैं, लेकिन असल जिंदगी में एनवायरनमेंट का रंग हर बार फीका पड़ जाता है। वोटरों को इस बार इस बात का ध्यान रखना होगा।


