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Diu : केआईबीजी ने पेंचक सिलाट का स्वर्ण जीतकर चमके मणिपुर के सुधीर मीतेई

Diu: Manipur's Sudhir Meitei Shines, Winning Gold in Pencak Silat at Khelo India Beach Games

दीव : (Diu) मणिपुर के वाहेंगबाम सुधीर मीतेई (Wahengbam Sudhir Meitei of Manipur) के लिए पेंचक सिलाट का सफर कभी आसान नहीं रहा। आर्थिक तंगी ने उन्हें कॉलेज की पढ़ाई छोड़ने पर मजबूर कर दिया था, तो एक गंभीर चोट ने उनके खेल करियर को लगभग खत्म कर दिया था। इसके बावजूद 19 वर्षीय सुधीर ने हार नहीं मानी और कड़ी मेहनत के दम पर खेलो इंडिया बीच गेम्स (केआईबीजी) (Khelo India Beach Games2026) में पेंचक सिलाट की गांडा स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। यह मुकाबले दिउ के गांडा स्थल पर खेले गए।

सुधीर ने साईं मीडिया से बातचीत में कहा, “हम पांच लोगों का परिवार है। मैं तीन भाइयों में सबसे बड़ा हूं। पिता छोटे स्तर पर पशुपालन का काम करते हैं। मैं वेल्डिंग का काम करता हूं, जिससे मुझे 500 रुपये प्रतिदिन मिलते हैं और खाली समय में पिता के साथ सूअर बेचने में मदद करता हूं।” आर्थिक समस्याओं के कारण सुधीर को बीपीएड (बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन) की पढ़ाई पांचवें सेमेस्टर में ही छोड़नी पड़ी। वह चाहते थे कि उनके दोनों छोटे भाई, जो अभी स्कूल में हैं और उसी अकादमी में प्रशिक्षण ले रहे हैं, खेल में आगे बढ़ें।

इंफाल की प्रसिद्ध नवांग स्पोर्ट्स अकादमी (Nawang Sports Academy) से निकले सुधीर ने 2018 में पेंचक सिलाट शुरू किया। उन्होंने जल्द ही राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई और जूनियर नेशनल्स में 45–50 किग्रा टांडिंग (कॉम्बैट) वर्ग में स्वर्ण जीता, इसके बाद उन्होंने 2021 में 50–55 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीता।2022 के नॉर्थ ईस्ट गेम्स में रजत पदक जीतने के बाद उनके करियर को बड़ा झटका लगा। अकादमी में उचित मैट न होने के कारण अभ्यास के दौरान उनका पैर फर्श के गड्ढे में फंस गया, जिससे पैर की उंगली गंभीर रूप से घायल हो गई। इस चोट के चलते उन्हें कॉम्बैट (टांडिंग) से हटकर आर्टिस्टिक और परफॉर्मेंस श्रेणी में जाना पड़ा।

सुधीर एक साधारण परिवार से आते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्हें कम उम्र में ही जिम्मेदारियां उठानी पड़ीं। लगातार दो वर्षों तक शांतिपूर्वक अभ्यास करने के बाद सुधीर ने शानदार वापसी की। उन्होंने लखनऊ में हुई ऑल इंडिया नेशनल चैंपियनशिप में गांडा स्वर्ण पदक जीता और वियतनाम में आयोजित एशियन पेंचक सिलाट चैंपियनशिप में चौथा स्थान हासिल किया, जो उनका पहला अंतरराष्ट्रीय अनुभव था। संघर्ष, मेहनत और जज्बे की यह कहानी सुधीर मीतेई को न सिर्फ एक चैंपियन बनाती है, बल्कि हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा भी है।

केआईबीजी 2026 में पहली बार हिस्सा ले रहे सुधीर ने रेत पर खेल की चुनौती के बावजूद शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा, “यह मेरा पहला खेलो इंडिया बीच गेम्स था। मैंने माता-पिता से वादा किया था कि स्वर्ण जीतकर लौटूंगा। फाइनल के दौरान घबराहट थी, लेकिन आखिरकार मैंने गोल्ड जीत लिया।” उन्होंने आगे कहा, “रेत पर प्रदर्शन करना आसान नहीं था, लेकिन यह एक नया अनुभव था। खेलो इंडिया जैसे मंच पर खेलना मेरे लिए खास रहा और स्वर्ण पदक इसे और यादगार बना देता है।”

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