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Mumbai : 29 महापालिकाओं पर महायुति का ही भगवा फहराएगा : नवनाथ बन

मुंबई मनपा चुनाव मराठी मानुस की नहीं, बल्कि एक परिवार की आख़िरी लड़ाई
मुंबई : (Mumbai
) आगामी महानगरपालिका चुनावों में महायुति विकास कार्यों के दम पर पूरी तरह मजबूत स्थिति (Mahayuti is in a strong position in the upcoming municipal elections) में है। मतदाताओं को यह विश्वास है कि मुंबई का विकास केवल महायुति ही कर सकती है। मतदाताओं ने महायुति के 3.5 वर्षों के विकास कार्यों को देखा है, वहीं पिछले 25 वर्षों में मुंबई महानगरपालिका के कामकाज और उबाठा सरकार के 2.5 वर्षों के कथित “घर बैठे वसूली” (“doorstep recovery”) वाले शासन को भी देखा है। इसी कारण विकास के लिए मतदाताओं का आशीर्वाद महायुति को ही मिलेगा और सभी 29 महापालिकाओं पर महायुति का झंडा फहरेगा, ऐसा विश्वास भाजपा के प्रदेश मीडिया विभाग प्रमुख नवनाथ बन ने मंगलवार को व्यक्त किया।

भाजपा प्रदेश कार्यालय (BJP state office) में आयोजित पत्रकार परिषद को संबोधित करते हुए नवनाथ बन (Navnath Ban) ने कहा कि कुछ लोग इसे मराठी मानुस की आख़िरी लड़ाई बताकर भावनाएं भड़काने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि यह मराठी मानुस की नहीं, बल्कि एक परिवार की आख़िरी लड़ाई है।

इस दौरान नवनाथ बन ने मुंबई में बिना नाम वाले पोस्टर लगाए जाने को लेकर उबाठा गुट और संजय राउत (Navnath Ban targeted the Ubatha faction and Sanjay Raut) पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उबाठा गुट में अपने नाम से पोस्टर लगाने की हिम्मत नहीं है। आदर्श आचार संहिता के दौरान पोस्टर नहीं लगाए जा सकते, इसलिए ऐसे बेनामी और अवैध पोस्टरों की जांच होनी चाहिए। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि “फटा पोस्टर निकला हीरो” की तर्ज पर ये पोस्टर फट चुके हैं और भाजपा महायुति का हीरो मुंबई में सामने आए बिना नहीं रहेगा। नवनाथ बन ने चुनाव आयोग से इन बेनामी पोस्टरों पर हुए खर्च की भी जांच करने की मांग की। साथ ही उन्होंने याद दिलाया कि मनसे के सात नगरसेवकों को तोड़कर पार्टी में शामिल कराने के समय पैसों का खुला खेल उबाठा गुट ने ही किया था।

संजय राउत के विवादित बयानों पर निशाना साधते हुए नवनाथ बन ने कहा कि राउत और उबाठा गुट अब सूर्य नहीं, बल्कि चांद के ज्यादा करीब हो गए हैं। हरे झंडे पर बना चांद अब उनके दल का प्रतीक बन गया है, इसी कारण वे बौद्धिक दिवालियापन दिखाने वाले बयान दे रहे हैं। मुंबई को उद्योगपतियों के हवाले किए जाने के आरोपों पर पलटवार करते हुए नवनाथ बन ने कहा कि जिन उद्योगपतियों के घरों की शादियों में उनके लोग नाचते थे, आज उन्हीं पर आरोप लगाए जा रहे हैं। मुंबई किसी उद्योगपति की नहीं, बल्कि आम नागरिक और आम मराठी मानुस की है, यह उन्होंने दोहराया।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए नवनाथ बन ने कहा कि उस पार्टी में शुरू से ही केवल एक ही राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे हैं—शरद पवार। जबकि भाजपा में एक सामान्य कार्यकर्ता भी राष्ट्रीय अध्यक्ष बन सकता है, यही भाजपा और राष्ट्रवादी शरद पवार गुट के कामकाज में बड़ा अंतर है।

कांग्रेस ने उबाठा गुट को उसकी हैसियत दिखा दी

नवनाथ बन ने कहा कि यदि उबाठा गुट राज ठाकरे के साथ जाता है, तो कांग्रेस उनके साथ नहीं आएगी। ‘इस्तेमाल करो और फेंक दो’ (“use and discard”) की नीति अपनाते हुए कांग्रेस ने उबाठा गुट को किनारे कर दिया है। कांग्रेस ने उबाठा गुट की हैसियत दिखा दी है। ठाकरे बंधुओं की दो शून्य एक साथ आईं, तो कांग्रेस का बचा-खुचा अस्तित्व भी समाप्त हो जाएगा—यह बात कांग्रेस अच्छी तरह समझ चुकी है।

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