कोलकाता : (Kolkata) आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज में हुए भ्रष्टाचार के मामले की सुनवाई मंगलवार से अलीपुर की विशेष अदालत (Hearing of the corruption case in RG Kar Medical College began in Alipore’s special court) में शुरू हुई। लेकिन पहले ही दिन सीबीआई की कार्यशैली पर अदालत ने सख्त नाराजगी जताई। न केवल जांच अधिकारी, बल्कि सीबीआई के वकील को भी अदालत की फटकार झेलनी पड़ी।
दरअसल, सीबीआई के अधिकारी बिना पूरी केस फाइल के अदालत में पेश हुए थे। अदालत में स्वास्थ्य विभाग के ओएसडी को गवाह के तौर पर बुलाया गया था और गवाही की प्रक्रिया शुरू हुई। इस दौरान अदालत ने सीबीआई से “मूल आरोपपत्र” (“original chargesheet”) प्रस्तुत करने को कहा। लेकिन सीबीआई के वकील ने कहा कि टाला थाने में जो चार्जशीट जमा की गई थी, वह आज की कार्यवाही में उपलब्ध नहीं है।
इस पर अदालत ने पूछा कि चार्जशीट क्यों उपलब्ध नहीं है? जांच अधिकारी ने जवाब दिया कि रिकॉर्ड शायद किसी अन्य कोर्ट में हो। इस पर जज ने तीखे लहजे में सवाल किया— झूठ क्यों बोल रहे हैं? रिकॉर्ड क्यों नहीं लाया गया? जब कस्टोडियल ट्रायल शुरू हो चुका है तो ऐसी लापरवाही और बहानेबाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अदालत ने यह भी पूछा कि जब मूल चार्जशीट ही पेश नहीं हुई तो मुकदमे की प्रक्रिया कैसे शुरू की गई?
सीबीआई को कड़ी चेतावनी देते हुए अदालत ने कहा कि आगे ऐसी गलती दोहराई गई तो जांच अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि आर. जी. कर मेडिकल कॉलेज के इस भ्रष्टाचार मामले में दो सितंबर 2024 को तत्कालीन प्राचार्य संदीप घोष समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया गया था। सीबीआई ने इस मामले में 29 नवंबर 2024 को आरोपपत्र दाखिल किया था।
यह घोटाला उस समय उजागर हुआ जब आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज की एक छात्रा के कथित बलात्कार और हत्या के मामले के दौरान कॉलेज के अंदर वित्तीय अनियमितताओं की जांच शुरू हुई। कॉलेज के पूर्व अधीक्षक अख्तर अली ने संदीप घोष के खिलाफ कई भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे।


