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New Delhi : नीतीश कुमार और नायडू की इफ्तार पार्टियों और ईद मिलन का बॉयकाट का फैसला

नई दिल्ली : (New Delhi) जमीअत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी (Jamiat Ulama-e-Hind President Maulana Arshad Madani) ने कहा है कि खुद को सेक्युलर कहने वाले नीतीश कुमार, चंद्रबाबू नायडू और चिराग पासवान जैसे नेताओं के बारे में कहा है कि जमीअत उलमा-ए-हिंद ने इनके सांकेतिक विरोध का फैसला लिया है। इसके तहत अब जमीअत ऐसे लोगों के किसी भी कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लेगी, चाहे वह इफ्तार पार्टी हो, ईद मिलन हो या अन्य कोई आयोजन हो।

जमीअत अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि देश में इस समय विशेष रूप से मुसलमानों के साथ किया जा रहा अन्याय और अत्याचार किसी से छुपा नहीं है। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि खुद को सेक्युलर और मुसलमानों का हमदर्द बताने वाले नेता सत्ता के लालच में न केवल खामोश हैं, बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से अन्याय का समर्थन भी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को हाशिए पर धकेलने की योजनाबद्ध साजिशें हो रही हैं। धार्मिक भावनाएं आहत की जा रही हैं, धार्मिक स्थलों को विवादों में घसीटा जा रहा है और दंगे कराकर मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है। इन घटनाओं पर भी यह तथाकथित सेक्युलर नेता आंखें मूंदे हुए हैं।

मौलाना मदनी ने नीतीश कुमार, चंद्रबाबू नायडू और चिराग पासवान जैसे नेताओं के बारे में कहा कि वह सत्ता की खातिर न केवल मुसलमानों के खिलाफ हो रहे अन्याय को नजरअंदाज कर रहे हैं, बल्कि देश के संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की भी अनदेखी कर रहे हैं। मौलाना मदनी ने कहा कि वक्फ संशोधन बिल पर इन नेताओं का रवैया इनके दोहरे चरित्र को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि यह नेता केवल मुसलमानों के वोट हासिल करने के लिए दिखावे का सेक्युलरिज्म अपनाते हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद मुस्लिम समुदाय के मुद्दों को पूरी तरह भुला देते हैं। इसी के मद्देनजर जमीअत ने निर्णय लिया है कि वह ऐसे नेताओं के आयोजनों में शामिल होकर उनकी नीतियों को वैधता प्रदान नहीं करेगी।

मौलाना मदनी ने देश की अन्य मुस्लिम संस्थाओं और संगठनों से भी अपील की है कि वह भी इस सांकेतिक विरोध में शामिल हों और इन नेताओं की इफ्तार पार्टियों और ईद मिलन जैसे आयोजनों में भाग लेने से परहेज करें। उन्होंने कहा कि जब देश में नफरत और अन्याय का माहौल पनप रहा है, तब इन नेताओं की चुप्पी उनके असली चरित्र को उजागर करती है। जमीअत उलमा-ए-हिंद ने देशभर में ‘संविधान बचाओ’ सम्मेलन आयोजित कर इन नेताओं को जगाने की कोशिश की, लेकिन इसका भी उन पर कोई असर नहीं पड़ा। मौलाना मदनी ने स्पष्ट रूप से कहा कि जब यह नेता हमारे दुख-दर्द से कोई सरोकार नहीं रखते, तो हमें भी उनसे किसी तरह की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए।

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