अमेठी : इस समय देशभर के लोगों की निगाहें अमेठी और रायबरेली लोकसभा के ऊपर लगी हुई है। हालांकि भारतीय जनता पार्टी ने अमेठी से वर्तमान सांसद एवं केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को एक बार फिर से अपना उम्मीदवार बनाया है। लेकिन कांग्रेस पार्टी अभी भी इन दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा नहीं कर सकी है।
अमेठी और रायबरेली में उम्मीदवार घोषित न होने की वजह से कांग्रेसी नेताओं और कार्यकर्ताओं में अनिश्चितता माहौल बना हुआ है। अभी तक लोकसभा चुनाव को लेकर किसी भी प्रकार की कोई सक्रियता अमेठी में नजर नहीं आ रही है। अमेठी में कांग्रेस के दफ्तर में छाई वीरानी इस बात का साफ संकेत है कि कांग्रेसी नेता और कार्यकर्ता इसी उधेड़बुन में लगे हुए हैं की भविष्य में क्या होगा? अमेठी और रायबरेली के तमाम कांग्रेसी नेता दिल्ली पहुंचकर लगातार गांधी खानदान को मनाने एवं आश्वस्त करने में लगे हुए हैं।
अमेठी के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता एवं गांधी परिवार के नजदीकी कहे जाने वाले धर्मेंद्र शुक्ला ने इस बात का दावा किया है कि अमेठी और रायबरेली दोनों सीटों से गांधी परिवार ही चुनाव लड़ेगा। उनका कहना है की राहुल गांधी वायनाड के साथ-साथ अपने मां की परंपरागत सीट रायबरेली से चुनाव लड़ेंगे। जबकि प्रियंका गांधी अमेठी से चुनाव मैदान में उतरकर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी से 2019 में भाई राहुल गांधी की हार का बदला लेंगी। इसके लिए कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं को अलर्ट कर दिया गया है।
2019 में लोकसभा चुनाव हारने के बाद राहुल गांधी ने जिस तरह से अमेठी से दूरी बना ली थी, उसके कारण उनके नेताओं और कार्यकर्ता भी कहीं ना कहीं खुद को हताश और निराश महसूस कर रहे थे। कुल 5 वर्षों में राहुल गांधी विधानसभा चुनाव और भारत जोड़ो न्याय यात्रा सहित सिर्फ 4 बार अमेठी आए। पिछले 19 फरवरी को नया यात्रा लेकर अमेठी पहुंचे राहुल गांधी ने लोकसभा चुनाव संबंधी कोई भी संकेत नहीं दिए। इसके बाद उनके नेताओं और कार्यकर्ताओं में निराशा का भाव जन्म ले लिया।


