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Begusarai: लड़कों से हुआ झगड़ा तो जुगनू कूदी अखाड़े में, पहली बार बिहार को दिलाया गोल्ड मेडल

बेगूसराय:(Begusarai) जीवन में घटने वाली छोटी-छोटी घटना भी कभी प्रेरणा स्रोत बन जाती है। ऐसा है कुछ हुआ बेगूसराय की बेटी जुगनू भारद्वाज (daughter Jugnu Bhardwaj) के साथ। वेटलिफ्टिंग की खिलाड़ी विनोदपुर निवासी जुगनू का जब गांव के लड़कों से विवाद हो गया तो उसने आमिर खान की फिल्म दंगल को बनाया अपने जिंदगी का लक्ष्य और आजादी के बाद पहली बार कुश्ती में बिहार को दिलवा दिया गोल्ड मेडल।

हम बात कर रहे हैं बेगूसराय के विनोदपुर निवासी मुकेश कुमार और मधुबाला शर्मा की पुत्री जुगनू भारद्वाज की। जिसने बीते दिनों दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कुश्ती प्रतियोगिता में बिहार को गोल्ड मेडल दिलवाया है। गोल्ड मेडल लेकर जुगनू बेगूसराय पहुंची तो पूरा गांव उसके स्वागत में उमड़ पड़ा। खेल विभाग ने भी जुगनू का जोरदार स्वागत किया। मां मधुबाला शर्मा ने खुशी से छलकते आंसू के बीच अपनी बेटी का चंदन वंदन किया। गांव के लोगों ने माला पहनकर कंधे पर उठा लिया। जुगनू ने बताया कि वह वेटलिफ्टिंग की खिलाड़ी थी।

2015 में गांव में खेलने के दौरान कुछ लड़कों से विवाद हो गया। पिता के पास जब विवाद की जानकारी पहुंची तो उन्होंने उन्होंने आमिर खान दंगल फिल्म देखने के लिए प्रेरित किया। जुगनू ने भी फिल्म को देखा और उसे अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया। पिता ने अपने घर के आहते में ही अखाड़ा बनवा दिया।

जहां जुगनू ने शुरू कर दी कुश्ती की तैयारी। किसान पिता मुकेश कुमार ने जब अपने पुत्री की ललक देखी तो हरियाणा के एक अखाड़ा में उसका नामांकन करवा दिया, जहां से तैयारी शुरू हो गई। देखते ही देखते जुगनू ने बिहार में परचम लहरा दिया। पिछले महीने सोनपुर में आयोजित राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त कर एक लाख का पुरस्कार प्राप्त किया।

दस दिसम्बर 2006 को पैदा हुई जुगनू भारद्वाज जब दिल्ली में आयोजित एसजीएफआई कुश्ती में भाग लेने पहुंची तो साहसा किसी को विश्वास ही नहीं था कि वह बिहार को पहली बार मेडल दिलाने में सफल होगी। अंडर-19 के 62 किलो वर्ग में सामने थी हरियाणा की पूर्वा। लेकिन जुगनू ने उसे पछाड़ दिया और प्राप्त कर लिया गोल्ड मेडल।

जुगनू कहती है कि कुश्ती में अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में देश को पदक दिलाना एवं ओलंपिक में प्रथम स्थान प्राप्त करना उसका लक्ष्य है। इस दिशा में सफल भी होगी। चाहते हैं कि हमें देखकर और भी बच्चे मोटिवेट हों, वह मेडल जीत कर लाएं तो हम भी उनका स्वागत करेंगे। इस सफलता का श्रेय माता, पिता और गुरु का है। जिनके हम आजीवन आभारी रहेंगे।

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