नई दिल्ली : गोवा में चल रहे 54वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) में सत्यजीत रे फिल्म और टेलीविजन संस्थान, कोलकाता के सहयोग से आयोजित मास्टर क्लास में अभिनेता पंकज त्रिपाठी ने लोगों को अभिनय के गुर सिखाए। गुरुवार को आयोजित मास्टर क्लास सत्र का संचालन फिल्म समीक्षक और पत्रकार मयंक शेखर ने किया।
अभिनय की कला पर बोलते हुए पंकज त्रिपाठी ने कहा कि दुनिया एक रंगमंच है और हम अपने जीवन में विभिन्न भूमिकाएं निभाते हैं। अभिनय वास्तविक जीवन की भूमिकाओं और भावनाओं का सार है। त्रिपाठी ने कहा कि एक कुशल अभिनेता बनने के लिए व्यक्ति को संवेदनशील होने की जरूरत है। अभिनय का उद्देश्य कि विभिन्न दृष्टिकोण को समझकर एक बेहतर इंसान बनाना है। पंकज त्रिपाठी ने कहा कि जब आप खुद को किसी की जगह पर रखकर स्थिति का आकलन करते हैं और उनके विचारों, भावनाओं, दृष्टिकोण को समझते हैं, तो आप भी एक बेहतर इंसान बन जाते हैं।
एक अभिनेता के रूप में अपने शुरुआती वर्षों के बारे में बताते हुए पंकज त्रिपाठी ने कहा कि सभी के जीवन में संघर्ष होता है, उससे स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब बात अस्तित्व की होती है तो अभिनय गौण हो जाता है। हालांकि उन्होंने अपने जुनून के साथ आगे बढ़ने में आशा के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सिर्फ आशा पर्याप्त नहीं है, आत्म-मूल्यांकन भी आवश्यक है।


