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Morena : दुनिया की सबसे कम उम्र की सीए बनी नंदिनी, शहरवासियों को गर्व

मुरैना : शहर की बेटी नंदिनी ने चंबल अंचल का नाम देश दुनिया में बढ़ाया है। उन्हें अभी हाल ही में दुनिया की सबसे कम उम्र की चार्टर्ड एकाउंटेंट बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। इस बात का खुलासा गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में नंदिनी का नाम दर्ज होने से हुआ। शनिवार को इस बात की जानकारी मुरैना शहरवासियों को हुई तो नंदिनी के घर बधाई देने वालों का तांता लग गया। नंदिनी के माता-पिता सहित अन्य परिजन जहां नंदिनी की इस उपलब्धि पर फूले नही ंसमा रहे वहीं शहरवासी भी अपनी इस होनहार बेटी पर गर्व कर रहे हैं।

छोटे से शहर मुरैना की रहने वाली नंदिनी अग्रवाल को सबसे कम उम्र की चार्टर्ड अकाउंटेंट होने की मान्यता मिली है। दुनिया की सबसे कम उम्र की सीए नंदिनी ने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना शामिल कर लिया है। नंदिनी ने 2021 में सीए फाइनल कर देश में टॉप किया था। नदिनी के बड़े भाई सचिन अग्रवाल ने भी 2021 में ही ऑल इंडिया में 18 वीं रैंक हासिल की थी। नंदिनी और सचिन दोनों ने 2017 में संयुक्त रुप से 12 वीं में अच्छे अंक हासिल कर टॉप किया था।

बता दें कि नंदिनी अग्रवाल बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि की थी। यही वजह रही कि उसने दो क्लास छोड़कर महज 13 साल की उम्र में 10 वीं की बोर्ड परीक्षा दी। फिर 15 साल की उम्र में 12वीं पास की और 19 साल की उम्र में गिनीज वल्र्ड रिकॉर्ड बना दिया। नंदिनी को गिनीज वल्र्ड रिकॉर्ड ने दुनिया की सबसे कम उम्र की महिला चार्टर्ड एकाउंटेंट माना है। जब नंदिनी अग्रवाल ने सीए फाइनल में देश में टॉप किया था तब वह 13 सितंबर 2021 को 19 साल और 330 दिन की थीं। भाई और बहन दोनों ने मिल का देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है। नंदिनी ने 2021 में सीए फाइनल में 800 (76.75:) में से 614 अंक हासिल किए। उन्होंने 83,000 उम्मीदवारों को पछाड़ते हुए देश में नंबर-1 रैंक हासिल की। उनके भाई को 568 अंक हासिल करके देश में 18 वी रेंकी हासिल की थी। जिसके बाद नंदिनी को सबसे कम उम्र की छात्रा मान कर गिनीज वल्र्ड रिकॉर्ड ने भी उन्हें मान्यता दी है।

हालांकि,इससे पहले सबसे कम उम्र के पुरुष सीए लखनऊ निवासी रामेंद्र चंद्र गांगुल ने मई 1956 में 19 साल की उम्र में यह उपलब्धि हासिल की थी। नंदिनी और उनके बड़े भाई सचिन ने 2017 में 12 वीं बोर्ड परीक्षा में संयुक्त रूप से मुरैना जिले में 94.5: अंक प्राप्त करके टॉप किया था।

नंदिनी अग्रवाल ने कहा है कि मैंने बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में आने का सपना तब देखा था तब मैं 11 वीं में थी। उस समय मुझे लगा था कि मेरा भी नाम होना चाहिए। तभी से मैने कड़ी मेहनत की। वहीं नंदिनी के पिता बताते हैं कि नंदिनी ने शुरू में ही दो क्लास जंप करके एडमिशन लिया था और पढऩे में काफी होशियार थी। आज उसने गिनीज वर्ल्ड ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज किया है। जिससे हम और हमारा परिवार काफी खुश है। क्योंकि देश और प्रदेश भर में ही नहीं बल्कि दुनिया भर में एक छोटे से जिले का नाम रोशन हुआ है। नंदिनी भी अपने भाई के साथ मुंबई में रहकर इस खुशी को सेलिब्रेट कर रही है।

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